क्या बगदाद बाब तेहरान चले गये?


2003 में अमेरिका नीत आक्रमण के दौरान अमेरिका के रिपोर्टरों ने इराक के सूचना मंत्री को " "बगदाद बाब' का नाम दिया था ( ब्रिटिश उन्हें कोमिकल अली कहते थे) । वे अपनी नियमित प्रेस वार्ता में गलत प्रचार करते हुए इराकी सेना की प्रशंसा करते और शानदार कहानियाँ सुनाते कि उन्होंने किस प्रकार विदेशी आक्रमणकारियों को कुचल दिया जबकि वही आक्रमणकारी पर्दे पर उनकी ओर बढते नजर आते थे।
लगता है कि अब ईरान के ब्रिगेडियर जनरल ने बाब को आत्मसात कर लिया है। हाल के दो उद्धरण ( कुछ अंग्रेजी अनुवाद में सम्पादन के साथ) :
  • इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कार्प्स के लेफ्टिनेंट कमान्डर ब्रिगेडियर जनरल हुसैन सलामी, " आई आर जी सी कभी भी अमेरिका की मिसाइलों की गडगडाहट और परा क्षेत्रीय शत्रुओं सहित इनके वायुयानों की विशालता से भयभीत नहीं हुआ उनकी दृष्टि में ये उपकरण बेकार के लोहे से अधिक कुछ नहीं है"
  • रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी ने सीरिया में अभी हाल में मारे गये अपने पूर्ववर्ती के स्थान पर ब्रिगेडियर जनरल बनने वाले साथी से टेलीफोन वार्ता में कहा जो कि इस्लामी गणतंत्र की समाचार सेवा द्वारा जैसा बताया गया, " ईरान को पूरा विश्वास है कि सीरिया की शक्तिशाली सुरक्षा व्यवस्था अमेरिका, इसके क्षेत्रीय सहयोगियों और इजरायल को इस क्षेत्र को लेकर पाली गयी महत्वाकाँक्षाओं से पीछे हटने को विवश कर देगी। उन्होंने कहा कि इजरायलवादी शासन और आतंकवादी सीरिया की सेना की शक्तिशाली इच्छा को प्रभावित नहीं कर सकते तथा सीरिया में मनोवैज्ञानिक कार्रवाई से इजरायल के लिये सशक्त भूमिका नहीं तैयार कर सकते" ।
टिप्पणियाँ :
(1) यह आशा करनी चाहिये कि टिप्पणियों में गम्भीरता और विश्वास न हो क्योंकि जैसा किThe Causes of War में ज्योफ्री ब्लेनी ने विश्वासपूर्वक तर्क दिया है कि अतिशय आशावाद युद्ध का कारण बनता है, " सामान्य तौर पर युद्ध का आरम्भ तब होता है कि जब दो देश अपनी अपेक्षाकृत शक्ति पर असहमत होते हैं और यह तब समाप्त होता है कि जब वे इस पर सहमत हो जाते हैं" ।
(2) यदि इन पर गम्भीरता से विश्वास न भी किया जाये तो भी ऐसे दावों की अपनी भूमिका है और कभी कभी इनके दुखद परिणाम होते हैं। ( 19 जुलाई, 2012)
डैनियल पाइप्स
मौलिक अंग्रेजी सामग्री: Has Baghdad Bob Moved to Tehran?हिन्दी अनुवाद - अमिताभ त्रिपाठी

1 टिप्पणी:

  1. मुगालते में जीने वालों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाये।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!