"स्वर्गीय,श्रीमती शकुन्तला निलोसे"


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  • "तीसरी कक्षा पास थी जब वैधव्य की छाया का साया पडा था "

जी हाँ शकुन्तला निलोसे तीसरी कक्षा पास थीं , एक नन्ही बेटी की जवाबदारी के साथ पति के निधन के बाद उस दौर की परिस्थियाँ कितनी कठिन थीं जब न तो इतनी जागृति थी और न ही अवसर , बहनजी के पास एक बेटी,तीसरी कक्षा तक पढाई का प्रमाण-पत्र,और साथ था -"आत्म-साहस"। उन्हौने हार नहीं मानी धीरे-धीरे एक-एक कक्षा पास करते एम० ए० पास कर शिक्षण कार्य में जुट गयी ये देवी ! मन में कवितायेँ उभरातीं और भर देतीं उछाह जीत ली बाधाएं "सकुन-बैण" ने....!हम सब,उनके जीवन से इतना ही सीख पाएं कि "आत्म-साहस से ही जीत है "उनको सच्ची श्रृद्धांजलि होगी......दहेज़ न लेने -देने के लिए मशहूर नार्मदेय-ब्राह्मण समाज की नियमित मासिक / अनियताकालिक/अन्य...पत्र पत्रिकाओं में उनके आलेख बेहद रुची के साथ पड़े जाते रहे हैं।

3 मार्च 2008 को जब वे इस दुनिया को अलविदा कह गई बहन जी जबलपुर नार्मदेय-ब्राह्मण समाज की संरक्षिका थीं साथ ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व भी था उनके पास ।

3 टिप्‍पणियां:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!