माओ के मवाद को साफ़ करना ही होगा

आतंकवादी 
वृथा कल्पनाओ से डरे सहमे
       बेतरतीब बेढंगे
नकारात्मक विचारो का सैलाब
   शुष्क पथरीली संवेदना
कटीले विचारो से लहू-लुहान
सूखी-बंज़र भावनाओ का निर्मम 
            "प्रहार "
कोरी भावुकता रिश्ते रेत सामान
हरियाली असमय वीरान
उजड़ता घरोंदा बिखरते अरमान
  टूटती-उखड़ती साँसे जीवन
             " बेज़ान  "
स्वयं से डरी सहमी अंतरात्मा
        औरो को डराती
शुष्क पथरीली पिशाची आत्मा का
          " अठ्ठाहास  "
वृथा कल्पनाओ से डरे सहमे बेतरतीब
       बेढंगे आतंकवादी
    सब के सब एक सामान
         आतंकवादी.......
  भगवानदास गुहा, रायपुर छत्तीसगढ़   
मैं खामोश बस्तर हूँ,लेकिन आज बोल रहा हूँ।
अपना एक-एक जख्म खोल रहा हूँ।
मैं उड़ीसा,आंध्र,महाराष्ट्र की सीमा से टकराता हूँ।
लेकिन कभी नहीं घबराता हूँ
दरिन्दे सीमा पार करके मेरी छाती में आते हैं।
लेकिन महुआ नहीं लहू पीकर जाते हैं।
मैं अपनी खूबसूरत वादियों को टटोल रहा हूँ
मैं खामोश बस्तर हूँ भाई साहब
लेकिन आज बोल रहा  हूँ।
गुंडाधूर को आजादी के लिए मैने ही जन्म दिया था।
इंद्रावती का पानी तो भगवान राम ने पीया था।
भोले आदिवासी तो भाला और धनुष बाण
चलाना जानते थे।
विदेशी हथियार तो उनकी समझ में भी नहीं आते थे।
ये विकास की कैसी रेखा खींची गयी,
मेरी छाती पे लैंड माईन्स बीछ गयी।
मैं खामोश बस्तर हूँ भाई साहब 
लेकिन बोल रहा हूँ
मेरी संताने एक कपड़े से तन ढकती थी।
हंसती थी,गाती थी,मुस्कुराती थी।
बस्तर दशहरा में रावण नहीं मरता है।
मुझे तो पता ही नहीं था
रावण मेरे चप्पे चप्पे में पलता है।
भाई साहब अब तो मेरी संताने भी
मुखौटे लगाने लगी हैं।
लेकिन ये नहीं जानती हैं कि
बहेलियों ने जाल फ़ेंका है।
मैने कल मां दंतेश्वरी को भी
रोते हुए देखा है।
मैं लाशों के टुकड़ों को जोड़ रहा हूँ
मैं खामोश बस्तर हूँ भाई साहब
लेकिन आज बोल रहा हूँ..
नक्सलवाद मेरी आत्मा का एक छाला था
फ़िर धीरे-धीर नासूर हुआ,
और इतना बढा-इतना बढा कि
बढकर इतना क्रूर हुआ
चित्रकूट कराह रहा है,कुटुमसर चुप है
बारसूर में अंधेरा घुप्प है,क्योंकि हर पेड़ के पीछे एक बंदुक है।
और बंदुक नहीं है तो उन्होने कोई रक्खी है।
अरे उन्होने तो अंगुलियों को भी
पिस्तौल की शक्ल में मोड़ रखी है।
सन 1703 में मैथिल पंडित भगवान मिश्र ने जिस दंतेश्वरी का यशगान लिखा,
उसका शब्द शब्द मौन है।
अरे कांगेरघाटी,दंतेवाड़ा,
बीजापूर,ओरछा,सूकमा कोंटा में
छुपे हुए लोग कौन हैं?
मेरी संताने क्यों उनके झांसे में आती हैं।
ये इतनी बात इनकी समझ में क्युं नहीं आती है।
सड़क और बिजली काट देने से तरक्की कभी गांव में नहीं आती है।
मैं अपने पुत्रों की आंखे खोल रहा हूँ,
*मैं खामोश बस्तर हूं भाई साहब लेकिन आज बोल रहा हूँ।*
6 अप्रेल को 76 जवान दंतेवाड़ा में शहीद होते हैं,
8 मई को 8 लोग शहादत से नाता जोड़ते हैं।
23 जून को 29 जवान शहीद होते हैं,
27 जून को 21 जवान शहीद होते हैं।
11 मार्च को 16 जवान शहीद होते है..  
अप्रैल 16 जवान शहीद होते है ....
कल फिर सुकमा में 26 जवान शहीद हो गये ......
*मैं शहीदों की माताओं के आगे  हाथ जोड़ रहा हूँ..*
*मैं खामोश बस्तर हूँ भाई साहब लेकिन बोल रहा हूँ...*
इंजीनियर सुनील पारे , विजय नगर जबलपुर    
बस्तर  की आज़ादी के नारे लगाता
जे एन यू.. जाधवपुर का हुजूम......
व्यवस्था के खिलाफ
बरसों से पाली जा रही
आयातित विचारधाराओं की विष बेलें
सहिष्णुता के नाम पर
डेमोक्रेसी के धुर्रे उडाती
माओ की विवादी जमात
पूर्वोत्तर में पलती कुंठा
एक असभ्य अभ्यास
सुनी है न
रवीश की बेतरतीब रिपोर्ट   
शहादत पर  
शब्दों का व्यापार करते
बेरहम लोग...
सुना है एवार्ड वापस नहीं हो रहे
माओ के मवाद
को
साफ़ करना ही होगा
कैसे ..........?
यही सोच रहे हैं ....... सब ........
वो भी जड़ से .........
जड़ कहाँ है
तुमको मालूम है न ?
गिरीश बिल्लोरे मुकुल , जबलपुर    

जबलपुर में एक लाख से अधिक स्कूली बच्चों ने रचा इतिहास : श्री अभिमनोज

जबलपुर. ‘‘हम सब ने ये ठाना है शहर को नम्बर 1 बनाना है’’ जैसे नारों के साथ शहर के एक लाख से अधिक स्कूली बच्चों ने आज इतिहास रच दिया. शहर के 448 शासकीय और अशासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी पूरे उत्साह के साथ सड़कों पर आये और बड़ों को स्वच्छता का संदेश दिया. स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जबलपुर को साफ सुथरा रखने और देश में जबलपुर को प्रथम स्थान दिलाने इस महाअभियान का आयोजन किया गया. कहीं हाथों में बैनर पोस्टर लेकर विद्यार्थियों ने स्व्च्छता का संदेश दिया तो कहीं छात्र छात्राओं ने आम लोगों और व्यापारियों को डस्ट बिन का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया.
स्वच्छता को लेकर पहली बार आयोजित इस व्यापक जागरूकता अभियान के दौरान महापौर डॉ श्रीमती स्वाती सदानंद गोडबोले, एमआईसी सदस्य और निगमायुक्त श्री वेदप्रकाश भी स्कूली विद्यार्थियों के बीच पहुंचे और उनका उत्साह बढ़ाया. महापौर ने कहा कि स्वच्छता को लेकर स्कूली विद्यार्थियों में आई जागरूकता समाज के लिए अच्छा संकेत है और उनके माध्यम से बड़े भी साफ सफाई के प्रति प्रेरित होंगे . स्वच्छता क्रांति का नजारा एक ही समय में शहर भर के स्कूली विद्यार्थियों द्वारा सड़कों पर आ जाने से पहली बार स्वच्छता क्रांति का एहसास हुआ. भविष्य को लेकर स्कूली बच्चोंकी चिंता और जागरूकता को देखकर बड़े भी प्रेरित हुए और उन्होंने विद्यार्थियों के हौसले और जज्बे को सराहा.
स्वच्छता को लेकर शहर में बड़ें पैमाने पर पहली बार हुए जागरूकता अभियान की सफलता पर महापौर डॉ श्रीमति स्वाती सदानंद गोडबोले और निगमायुक्त श्री वेदप्रकाश ने सहभागिता करने वाले सहयोग के लिये जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया है . महापौर ने आशा व्यक्त की है कि स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने के लिये इस अभियान से समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और नागरिकों में सफाई के प्रति गंभीरता आएगी.
इस अवसर पर महापौर डॉं. श्रीमती स्वाती सदानंद गोडबोले, मेयर इन काउंसिल के सदस्य श्री मनप्रीत सिंह आनंद, श्री कमलेश अग्रवाल, श्री श्रीराम शुक्ला, श्री नवीन रिछारिया, श्री रमेश प्रजापति, श्रीमती दुर्गा देवी उपाध्याय, श्रीमती रेखा सिंह ठाकुर, श्रीमती इन्द्रजीत कौर कुंवरपाल सिंह शेरू, श्रीमती वीणा रजनीश जैन, श्रीमती ज्योति कुरील, पार्षदगण, निगमायुक्त श्री वेदप्रकाश, अपर आयुक्त श्री गजेन्द्र सिंह नागेश, श्री रोहित सिंह कौशल, उपायुक्त श्री राकेश अयाची, श्री जी.एस. बघेल, श्रीमती अंजू सिंह ठाकुर के साथ साथ सभी नगर निगम के विभागीय प्रमुख, संभागीय अधिकारी, तथा समस्त मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों ने भी स्कूलों के प्राचार्यो तथा प्राध्यापकों के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन कर उनकी निगरानी की.