2018 में एक बार फिर मिसफिट ब्लॉग को मिला हिन्दी के श्रेष्ठ ब्लॉग का दर्ज़ा ..!


आप सब के आशीर्वाद से तथा विश्व की असीम अनुकंपा से भारतवर्ष के श्रेष्ठ 125 हिंदी चिट्ठाकारों में मेरा ब्लॉग शामिल है । स्नेही जन जाने के अंतरजाल पर मुझ तक पहुंचने वाली और मुझे पढ़ने वाली लोगों की संख्या 1000000 से भी अधिक हो चुकी है । जिनमें मेरा सबसे लोकप्रिय ब्लॉग है मिसफिट जिसकी रीडरशिप 470000 से अधिक है जो मुझे ब्लॉग सूची में शामिल कराता है इस ब्लॉग को भारत यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका तथा वर्तमान में सिंगापुर में सबसे ज्यादा पढ़ा जा रहा है हिंदी चिट्ठाकारी का उद्देश्य गूगल अथवा अंतरजाल को हिंदी की शब्दावली वाक्य विन्यास से इतना परिचित करा देना है जिससे विश्व के किसी भी भाषा से हिंदी अथवा हिंदी से उस भाषा में अनुवाद सहजता से हो सके तथा अधिकतम कंटेंट हिंदी में अंतरजाल पर मौजूद रहे ।
मैं 2007 से हिंदी चिट्ठाकार कारिता से जुड़ा हुआ हूं तब हमें ब्लॉग लिखने की प्रक्रिया में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था । तब यूनिकोड की आमद नहीं हुई थी । उस दौर से लगातार आज तक हम सभी अंतरजाल पर लिखने वाले लिखने का कार्य करते जा रहे हैं । जबलपुर संस्कारधानी के सबसे पहले ब्लॉगर के रूप में कनाडा के नागरिक श्री समीर लाल समीर तदुपरांत मैं यानी गिरीश बिल्लोरे , डॉ विजय तिवारी किसलय, भाई पंकज गुलुष, भाई हिमांशु राय के अलावा भाई श्री राजेश दुबे कार्टूनिस्ट आदि संलग्न है श्री महेंद्र मिश्रा बेहद प्रभावी लेखन के साथ समय चक्र पर लिखने का कार्य कर रहे हैं ।
हिंदी ब्लॉगिंग के जरिए मैंने 2009 में पहली बार पॉडकास्टिंग अर्थात ऑडियो ब्लॉगिंग शुरू की थी जो उस दौर का सबसे ज्यादा लोकप्रिय कार्य था इसके जरिए हम टेलीफोन पर लोगों से बात कर उनके ऑडियो को उनकी अनुमति से रिकॉर्ड करते हुए उसे एचटीएमएल में कन्वर्ट कर अपने ब्लॉग पर पोस्ट किया करते थे इस कार्य में मुझे सहयोग मिला इंदौर की ब्लॉग लेखिका अर्चना चावजी का उसके बाद बेमबज़र वेबसाइट की सहायता से हमने पॉडकास्टिंग शुरू की तब गूगल ने यह सुविधा प्रदान नहीं की थी हम उक्त वेबसाइट की सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान में मौजूद व्यक्ति के साथ लाइव बातचीत करते हुए लाइव हो जाते हैं यह वेबकास्टिंग अचानक बेहद लोकप्रिय हुई क्योंकि यह आश्चर्यचकित कर देने वाली थी । इसमें हमने ना केवल भारत बल्कि विश्व के कई देशों में रह रहे भारतीयों से बातचीत कर उस बातचीत को लाइव वेबकास्ट किया इसी क्रम में मुझे 2009 में वेबकास्टिंग के लिए दिल्ली में सम्मानित किया गया जो गूगल में मौजूद है ।
इस तकनीकी प्रयोग से हमने उत्तराखंड से सीधा प्रसारण किया किंतु प्रसारण केंद्र उत्तराखंड ना होकर जबलपुर में मेरा निवास था । यह विवरण गूगल के सर्च एंजिन पर मौजूद है आप देख सकते हैं । इस प्रयोग का असर यह हुआ की सबसे पहले हिंदी लेखन के साथ साथ वीडियो प्रसारण तथा ब्लॉगिंग में नए प्रयोग करने का हम गैर तकनीकी लोगों को अवसर मिला जिसका विवरण कादंबिनी में भी प्रकाशित हुआ था इसके अलावा लाखों दर्शकों ने कई लाइव वेबकास्ट को पसंद भी किया । साथ ही गूगल ने भी वेबकास्टिंग ग्रुप वेबकास्टिंग जैसी प्रक्रिया आरंभ कर दी ।
और यह सब हुआ जबलपुर से प्रारंभ हुआ था. पॉडकास्टिंग वेबकास्टिंग मेरे लिए बहुत ही आश्चर्यजनक अनुभव था .  उन दिनों मैं गंभीर रूप से फेफड़े की  बीमारी और एक अन्य समस्या में उलझा हुआ था परंतु वही दौर मेरे लिए वैश्विक उपलब्धि से भरा दौर लगता था । 
सुधी पाठकों अंतरजाल पर काम करते वक्त 100-200 शब्द लिखना बेहद कठिन एवं जोखिम भरा था समय भी बेहद खर्च होता था । घर परिवार की नसीहतों को सुनना मेरी नियति बन गई थी । महंगी इंटरनेट सेवाएं बजट बिगाड़ रही थी परंतु जुनून ऐसा था कि काम छोड़ने की इच्छा ना थी । समय कम था सरकारी कामकाज तू कब लिखे ऑफिस में लिखना भी मुश्किल ऑफिस का इंटरनेट इस्तेमाल करना मुझे अपराध बोध ग्रस्त कर देता था । विकल्प एक मात्र था लिखना ज़िद थी की अंतर्जाल पर इतने हिंदी रख दी जावे कि गूगल भी बाध्य हो जाए हिंदी भाषा को अपने में सम्मिलित करने के लिए ।
यह पागलपन सिर्फ मुझ में नहीं बहुत दिनों में था आज तो 125 लोगों की सूची जारी हुई है उनमें अधिकांश उसी दौर के पागल समझे जाने वाले लोग शामिल हैं अब तो मैं लिख भी लिख रहा हूं तो वॉइस टाइपिंग से इंटरनेट पर मौजूद सुविधाएं हर काम को आसान बना रही है ! लोग लिख रहे हैं तब के दौर में हम सौ डेढ़ सौ लेखक कवि विचारक विषय विशेष पर लिखने वाले लोग सक्रिय थे । हम एक दूसरे को पढ़ते एक दूसरे से सहमति असहमति व्यक्त करते हुए इस यात्रा में शामिल हुए 2007 से लेकर आज तक यात्रा सतत जारी है हमने अपनी जिद को नहीं छोड़ा है हम लिख रहे हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी उसे विस्तारित कर रही है अंतरजाल पर अपनी जगह बना रहा है यूनिकोड वॉइस टाइपिंग फोंट कन्वर्जन की समस्या नहीं है परंतु 2007 से आज तक लगातार काम करने के बाद भी विश्व की प्रसिद्ध कंपनी गूगल हमें विज्ञापन से वंचित रखती है बीच में हिंदी लेखकों के लिए तो गूगल ने विज्ञापन देने ही बंद कर दिए थे और अभी भी जो दिए जा रहे हैं उनसे होने वाली आय ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है ।
परंतु राष्ट्रभाषा के प्रति हम अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए लिखते जा रहे हैं यह अलग बात है कि अंग्रेजी अथवा चीनी भाषा में लिखने वालों को हमसे अधिक राशि प्राप्त हो रही है गूगल का यह दोगला रवैया हिंदी लेखकों के प्रति उसकी संवेदनशीलता का प्रमाण है हो सकता है कि गूगल मेरे इस लेख को प्रतिबंधित भी कर दे परंतु सच्चाई को उजागर कर देना बहुत जरूरी है ताकि हिंदी चिट्ठाकारी को प्रोफेशनल तौर पर अपनाने वाले यह तय कर सकें कि उन्हें आर्थिक लाभ नहीं होने वाला है यह सिर्फ एक जुनून है एक पागलपन है 
डायरेक्टरी आफ हिंदी ब्लॉग्स नामक वेबसाइट में वर्ष 2018 के लिए चुनिंदा 125 सुप्रसिद्ध ब्लॉग्स की सूची जारी कर दी है 2018 में उनके मूल्यांकन में जो श्रेष्ठ ब्लॉक पाए गए उनमें मेरा भी एक ब्लॉक मिसफिट शामिल किया गया ।

साथी जबलपुर मूल के कनाडा निवासी एवं कनाडा के नागरिक चार्टर्ड अकाउंटेंट चिट्ठाकार श्री समीर लाल का ब्लॉग उड़न तश्तरी भी इस सूची में शामिल है। Directory of Best Hindi Blogs हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगों की डायरेक्टरी

The seventh edition of the Directoryof Best Hindi Blogs has been released on 30th September 2018. It has 125 blogs, listed alphabetically [according to the operative part of the URL].  30 सितंबर 2018 को ज़ारी हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगों की डायरेक्टरी का 7वां संस्करण आपके सामने प्रस्तुत है. इसमें 125 ब्लॉग हैं जिन्हें उनके URL के पहले अंग्रेज़ी अक्षर के क्रम में लगाया गया है. 4yashoda मेरी धरोहर  aapkaablog आपका ब्लॉग  aarambha आरम्भ  abchhodobhi अब छोड़ो भी  achhikhabar Achhikhabar  ajit09 अजित गुप्‍ता का कोना  akanksha-asha Akanksha  akhtarkhanakela आपका-अख्तर खान "अकेला"  akoham एकोऽहम्  andhernagri अंधेर नगरी  anitanihalani मन पाए विश्राम जहाँ  anubhaw अनुभव  apnapanchoo अपना पंचू  apninazarse अपनी नज़र से  archanachaoji मेरे मन की  artharthanshuman Arthaat  aruncroy सरोकार  ashokbajajcg ग्राम चौपाल  asuvidha असुविधा....  baatapani बात अपनी  bal-kishore Bal-Kishore  bamulahija Bamulahija  bastarkiabhivyakti बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे कोई झरना...  bhadas भड़ास blog  bhartiynari भारतीय नारी  boletobindas Bole to...Bindaas....बोले तो....बिंदास  brajeshgovind यही है जिन्दगी  brajkiduniya ब्रज की दुनिया  bulletinofblog ब्लॉग बुलेटिन  burabhala बुरा भला  chandkhem हरिहर  chandrabhushan नजरबट्टू  charchamanch चर्चा मंच  chavannichap chavanni chap (चवन्नी चैप)  chouthaakhambha चौथा खंबा  dakbabu डाकिया डाक लाया  devendra-bechainaatma बेचैन आत्मा  doosrapahlu दूसरा पहलू  dr-mahesh-parimal संवेदनाओं के पंख  ek-shaam-mere-naam एक शाम मेरे नाम  firdausdiary Firdaus Diary  gahrana गहराना  geetkalash गीत कलश  girijeshrao एक आलसी का चिठ्ठा  gopalpradhan ज़माने की रफ़्तार  gulabkothari Gulabkothari's Blog  gustakh गुस्ताख़  gyandarpan ज्ञान दर्पण  harshvardhantripathi हर्षवर्धन त्रिपाठी  hathkadh Hathkadh  hindi-abhabharat.com हिन्दी-आभा*भारत हिन्दी-आभाभारत  hinditechy Hindi Techy  indorepolice Indore Police News  jhoothasach झूठा सच - Jhootha Sach  jindagikeerahen जिंदगी की राहें  kabaadkhaana कबाड़खाना  kajalkumarcartoons Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून  kavitarawatbpl KAVITA RAWAT  kpk-vichar मेरे विचार मेरी अनुभूति  krantiswar क्रांति स्वर  kuchhalagsa कुछ अलग सा  kumarendra रायटोक्रेट कुमारेन्द्र  laharein लहरें  laltu आइए हाथ उठाएँ हम भी  lamhon-ka-safar लम्हों का सफ़र  lifeteacheseverything मेरी भावनायें...  likhdala likh dala  logbaag लोग-बाग  madhurgunjan मधुर गुंजन  main-samay-hoon समय के साये में  mykalptaru कल्पतरु  naisadak कस्‍बा qasba  neerajjaatji मुसाफिर हूँ यारों  ngoswami नीरज  omjaijagdeesh वंदे मातरम्  onkarkedia कविताएँ  pahleebar पहली बार  pammisingh गुफ़्तगू  pittpat बर्ग वार्ता - Burgh Vartaa  poetmishraji Amit Mishra  pramathesh jigyasa जिज्ञासा  prasunbajpai पुण्य प्रसून बाजपेयी  pratibhakatiyar प्रतिभा की दुनिया  purushottampandey जाले  radioplaybackindia रेडियो प्लेबैक इंडिया  rahulpandey चक्र-व्यू  ranars Agri Commodity News English-Hindi  rangwimarsh रंगविमर्श  raviratlami छींटे और बौछारें  rekhajoshi Ocean of Bliss  rooparoop रूप-अरूप  rozkiroti रोज़ की रोटी - Daily Bread  sadalikhna सदा  sanjaybhaskar शब्दों की मुस्कुराहट :)  sanskaardhani मिसफिट Misfit  sanyalsduniya2 अग्निशिखा :  sapne-shashi sapne(सपने)  sarokarnama सरोकारनामा  satish-saxena मेरे गीत !  seedhikharibaat सीधी खरी बात..  shalinikaushik2 ! कौशल !  sharadakshara sharadakshara  shashwat-shilp शाश्वत शिल्प  shubhravastravita मंथन  sriramprabhukripa श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो  sudhinama Sudhinama  sumitpratapsingh सुमित के तड़के  supportmeindia Support Me India  swapnmere स्वप्न मेरे................  teesarakhamba तीसरा खंबा  tensionproof Y K SHEETAL  travelwithmanish मुसाफ़िर हूँ यारों... (Musafir Hoon Yaaron…)  tsdaral अंतर्मंथन  udantashtari उड़न तश्तरी ....  ulooktimes उलूक टाइम्स  vandana-zindagi जिन्दगी  vatsanurag सबद   vigyanvishwa विज्ञान विश्व  wwwsamvedan सहज साहित्य 

सोशल-मीडिया पर छील देते हैं मित्र सलिल समाधिया

            
 सलिल समाधिया 
  स्वभाव गत बेबाक ,  
 सलिल समाधिया  मेरी मित्रसूची में सर्वोपरी हैं. सोशल मीडिया के जबलपुरिया  लिक्खाड़ इन दिनों स्तब्ध नि:शब्द से जान पडतें हैं. सलिल फ़िज़ूल बातों से दूर अपनी मौज की रौ में बह रहे हैं.  आइये हम देखें एक ज़बरदस्त पोस्ट .. 
कल एक मित्र ने पूछा , "आप, सामाजिक, राजनैतिक विषयों पर क्यों नहीं लिखते हो ? अब जवाब सुनिए,          हाँ, मैं नहीं लिखता ..रेप पर , मॉब लिंचिंग पर, राजनीति पर, गरीबों की व्यथा पर , क्योंकिं... मैं नहीं चाहता की मैं अपनी पीड़ा और आक्रोश का लावा शब्दों के जाम में उडेलूं और उसे सोशल मीडिया पर शराब की तरह पिया जाए...
क्योंकि ..बोल लेने से , बक लेने से बुझ जाती है ..आग चुक जाता है ..वीर्य कुंठित हो जाता है ..पुंसत्व ! इसीलिए तॊ ये देश , क्लीवों का देश हो गया है ! ..क्योंकि , चित्रों , नाटकों और कविताओं ने सोख ली है ...ज़ेहन की गर्मियां और कसी मुट्ठियों की आग !
हां , मैं प्रेम बांटता हूं , और आग संजो के रखता हूं , इस क़दर कि , काट सकूं , अस्मत पे बढ़ते हाथ ! रुदन बना सकूं , राक्षसी अट्टहास को !
प्रेम , श्रंगार, सौंदर्य के मामलों में मैं कवि हूं , पाप और अन्याय के मामलों में मैं फ़ौजी हूं !
     ये आत्मश्लाघा नहीं है , किन्तु हमारे मित्र , परिचित , और विशेषकर महिला मित्र इस बात को भली तरह जानते हैं कि ...अन्याय के विरुद्ध , कैसी - कैसी ताक़तों से हम .लोहा लिए हैं !
लेकिन समाजिक विषयों पर लेख लिखना , मुझे बिल्कुल नहीं भाता , . ...बहुत से कारण हैं , चलिए एक उदाहरण देता हूं कि मैं स्त्री - विमर्श पे क्यों नहीं लिखता ...
बहुत खरा और कड़वा लिखूंगा , टॉलरेट कर लीजिएगा !
कहीं दूर नहीं , अपने ही मित्रों की बात करूंगा , जिनमें प्रोफ़ेसर , क्लास वन ऑफिसर्स , वक़ील , कलाकार सब शमिल हैं ! पहले ये जान लीजिए कि भारत के पुरुषों का ' माइंड सेट ' क्या है ? भारत का पुरूष निहायत ही छिछोरा , लम्पट और घोर पुरुषवादी सोच का है !
     भारत में 10 में से 7 पुरुष आपको ऐसे मिलेंगे जो अपनी प्रेमिका को 'सेटिंग ' और मिलन को 'काम लगा दिया ' जैसे शब्दों से सुशोभित करते हैं ! अपनी पत्नियों के बारे में भी बाहर बहुत भौंडे शब्दों का प्रयोग करते हैं वो स्त्री , जो प्रेम में अपना सर्वस्व उत्सर्ग कर देती है , उसके लिए सेटिंग और सामान जैसे शब्द ..? बेशक ये शब्द भारत के पुरुष के अवचेतन (..sub - conscious ) में छिपे भावों का पता देते हैं ! जहां प्रेम.... है ही नहीं , बस गंदी , लिजलिजी वासना का राक्षस खड़ा है ! अब ऐसे छिछोरे वीर्य कणों से जो संतानें पैदा होंगी , वे निहायत ही पुरुषवादी , स्त्री को भोग और दासी समझने वाली न होंगी , ऐसा सोचना , आँख पे पट्टी बांध लेना ही है ! ये सामूहिक मनसिकता सब ओर संचारित है ! और यही प्रकट होती है बच्चों , स्त्रियों पे गिद्धों की तरह !
           अब आप लाख सोशल मीडिया पे निर्भया कठुआ ,मंदसौर करते रहिए , मगर जब तक आपके घर के पुरुषों के रक्त में ये कुंठित पुरुषवाद दौड़ रहा है आपके लेख , कविताओं , चित्रों से कुछ नहीं उखड़ने वाला !            आपमें साहस है तॊ स्पॉट पे प्रहार करें ! लेकिन वो तॊ तब होगा न , जब नसों में लावा बह रहा होगा , आप तॊ कविताएं , लेख , टिप्पणी लिखकर नदारत हो जाने वालों में से हैं न ! !
               इन छिछोरों से आप प्रेम की , रोमांस की , भावनाओं की गहराई की अपेक्षा करते रहिए , मैं नहीं कर सकता ! .....जी हाँ , मैं इसीलिए नहीं लिखता इन विषयों पर ! !
साइकोलोजिस्ट कहते हैं कि अगर आत्महत्या करने वाला व्यक्ति , एक पेज़ से लम्बा सुसाइड नोट लिख ले , तॊ फिर उसके सुसाइड करने कि संभावना ख़त्म हो जाती हैं ! ...क्योंकि उसका अवचेतन सब उगलकर शान्त हो जाता है !
             भारत में कोई क्रांति नहीं हो सकती , क्योंकि सोशल मीडिया पे सामाजिक सरोकारों के लेख , चित्र , कविताएं ..सब गर्मी और आक्रोश को सोख लेते हैं !
छिनाल पन से भरे चित्त , रेप के विरोध में लिख रहे हैं ! आकंठ भ्रष्टाचारी , ईमानदारी और परिवर्तन की बातें करते हैं ! स्वयं क्रूरता से भरे तमाशबीन लोग , .. स्त्री अत्याचार , मॉब लिन्चिन्ग , दलित उत्पीड़न पर लिख रहे हैं !
नहीं , मैं कभी भी इस .नकली जमात में खड़ा नहीं हो सकता ! मैं नहीं चाहता कि मेरा वीर्य , सोशल मीडिआ के अक्षर सोख लें ! ...मैं इस दिव्य असंतोष के लावे के तेज से दैदीप्यमान हूं ,
...इसीलिए, ' स्पॉट ' पे जूझता हूं , ' पोस्ट , पे नहीं !