सशर्त होगी जबलपुर ब्रिगेड की सदस्‍यता

हमारे कामन्‍डर के पास अनंत निवेदन जबलपुर ब्रिगेड में शामिल होने के लिये आ रहे है, ब्रिगेड के ब्रिगेडियर होने के नाते मै एक सुझाव रखना चाहता हूँ। चूकिं नाम से ही पता चलता है कि जबलपुर से किसी न किसी प्रकार सम्‍बन्‍ध रखने वालो का ब्‍लाग है। जबलपुर ब्रिगेड में शामिल होने के लिये एक लघु शर्त मै रखना चाहूँगा कि शामिल होने के लिये किसी न किसी प्रकार से जबलपुर से जुड़ाव होना चाहिये। यह जुडाव जबलपुर के घाट पर माँ नर्मदा के गोद के बैठकर उनके पवित्र जलपान से ही हो। ताकि सदस्‍यो का जबलपुर से जुड़ाव भी हो। उपरोक्त जो बात मैने कही है, उसे बिग्रेड में शामिल होने की शर्त मानी जाये और आगे से शामिल होने के लिये इस मॉं नर्मदा का आशीर्वाद आवाश्‍यक है। हाल में ही शामिल जबपुर ब्रिगेड में शामिल महफूज जी, अजय कुमार झा और पाबला जी को ब्रिगेडियर बनने की बहुत बहुत बधाई, जल्‍द ही आप लोग मॉ नर्मदा का आशीर्वाद लेने जबलपुर पहुँचिये।

माँ नर्मदा से आशीर्वाद से एक शुभ समाचार देना चाहूँगा, जबलपुर बिग्रेड बनते ही ब्रिगेड की पेज गूगल रैंक 4 हो गई है, माँ नर्मदा के आशीष से आगे बिग्रेड और उन्नति करेगा। तब तक के लिये ब्रिगेडियर महाशक्ति को अनुमति दीजिए।
वंदेमातरम् - जय हिन्‍द - जय भारत

7 टिप्‍पणियां:

  1. हमारा तो जबलपुर से इतना ही सम्बन्ध है कि एक बार भेड़ाघाट घूमने गये थे तो एक पत्थर उठा लाये थे, आज भी घर पर रखा है… देखिये कभी इस मद में सदस्यता का कोई प्रावधान हो तो !!! :)

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  2. मैं एक बार जबलपुर गया हूं , कसम से, फोटू भी घिंचाया था भेड़ा घाट पर । हम अपने ब्लाग पर उसको लगाया भी हूं

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  3. मेरा जबलपुर से बहुत गहरा नाता है......... नैपिएर टाउन .... में पेट्रोल पम्प के सामने जो मदन महल रेलवे स्टेशन कि ओर जो सड़क जा रही है.... वहीँ एक आई . आई . टी कोअचिंग सेंटर है.... चौराहे पे... उसी के बगल में मेरा ननिहाल है.....

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  4. मेरी नानी जबलपुर से ही हैं.... और मैं सैकड़ों बार bhedaghat घूम चुका हूँ.....वहां भेदाघट से पहले एक वाटर पार्क है........ वहां तो मैं अक्सर आता जाता रहता हूँ............

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  5. बहुत बधाई जी. हमने तो जबलपुर मे बडकुल हवाई की जलेबियां खा खा कर तंदरुस्ती पाई है.:)

    रामराम.

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  6. सभी टिप्पणीकार ब्लॉगर साहबान की सूचनार्थ आज की बैठक में लिए निर्णय टांग दिए गए हैं नोटिस बोर्ड पर

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!