आनंद कृष्ण

हिन्दी निकष

साहित्य-समीक्षा ब्लाग'स का मालिकाना हक़ इन श्रीमान जी के पास है.... जबलपुरिया हैं , मजेदार गोलमटोल से आदमीं हैं ये भाई साहब । विनोद प्रिय इतने कि सदैव मुदिता का माहौल बना लेतें हैं अपने आस पास ।
टेलीफून विभाग में अधिकारी हैं , गीत कविता से गहरा नाता रखने वाले आनंद कृष्ण "सांड नरसिंहपुरी " के शहर नरसिंहपुर के मूल निवासी हैं आम लगे हैं इनके नरसिंहपुर में।
आप सोच रहें होंगे कि मैं एग्रीगेटर का काम क्यों करने लगा .....!
सो:-" हे ...! समीरादी [उडन तश्तरी ...., ]गुनी ब्लागरो मुझे सभी जबलपुर : मध्य प्रदेश में है जहाँ : भारत के सर्वाधिक ब्लॉगर नामक जीव पाए जाएंगे ,अगले १० बरस में हर दूसरा व्यक्ति जो अन्तर जाल से जुड़ा होगा ब्लॉगर होगा। इक माह में ४-४ नए ब्लाॅगर Bavaal Much Rahaa Hai भी है
है न कमाल.....

2 टिप्‍पणियां:

  1. है तो वाकई कमाल!! आपके प्रयासों से यह प्रण जरुर पूरा होगा. शुभकामनाऐं.

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!