ब्लॉग-पार्लियामेन्ट

ब्लॉग जगत अब प्रजातान्त्रिक-सूत्र में पिरोया जाने वाला है। इसकी कवायद कई दिनों से फुनिया फुनिया के कई दिनों से जारी थी. सूत्रों ने बताया इस के लिए आभासी-संविधान की संरचना के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं . बताया जाता है की जिस शहर में सर्वाधिक ब्लॉगर होंगे उसे "ब्लागधानी "बना दिया जाएगा . ब्लॉग'स में प्रान्त/भाषा/जाति/वरन/वर्ग/आयु का कोई भेदभाव नहीं होगा . कुन्नू सिंह की अध्यक्षता में बनने वाली ब्लॉग-संविधान की संरचना की जानी लभग तय है. जिसके प्रावधानों में निहित होगी ब्लॉग-सरकार की व्यवस्थाएं .अंतरिम-सरकार के सम्बन्ध में अनाधिकृत जानकारी के अनुसार एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाना है जिसका संघीय स्वरुप होगा . तथा शासनाध्यक्ष /मंत्रालय की निम्नानुसार व्यवस्था प्रस्तावित होगी :-

  1. ब्लागाध्यक्ष: एक पद
  2. प्रधान-ब्लॉग-मंत्री
  3. अन्तर-राष्ट्रीय मामलों के मंत्री
  4. कायदा-मंत्री
  5. टिप्पणी-मंत्री
  6. प्रति-टिप्पणी मंत्री
  7. गुम-नाम टिप्पणी प्रतिषेध-मानती
  8. बिन-पडी पोस्ट टिपियाना मंत्री
  9. नारी-ब्लॉग मंत्री
  10. राजनीतिक /धर्म/संस्कृति/तकनीकी सहित उतने मंत्री होंगें जितने विषयों पर ब्लॉग लिखे जा रहें हैं।
इस सबके लिए गूगल बाबा से भरपूर मदद के आश्वासनों से बारे जहाज उड़नतश्तरी के पीछे-पीछे जबालिपुरम के तेवर नामक स्थान पर आराम से उतर गए हैं । फुर्सत मिलते ही फ़ुरसतिया जी रवि रतलामी जी के अलावा नीचे लिखी सूची में दर्ज ब्लॉग मालिक आने वाले है .......
पढ़ें">1. मानसिक हलचल
पढ़ें">2. मोहल्ला
पढ़ें">3. हिन्द-युग्म
पढ़ें">4. सारथी
पढ़ें">5. फुरसतिया
पढ़ें">6. उडन तश्तरी ....
पढ़ें">7. अज़दक
पढ़ें">8. भड़ास blog
पढ़ें">9. एक हिंदुस्तानी की डायरी
पढ़ें">10. निर्मल-आनन्द
पढ़ें">11. Raviratlami Ka Hindi Blog
पढ़ें">12. आलोक पुराणिक की अगड़म बगड़म
पढ़ें">13. रचनाकार
पढ़ें">14. शब्दों का सफर
पढ़ें">15. चिट्ठा चर्चा
पढ़ें">16. कबाड़खाना
पढ़ें">17. प्रत्यक्षा
पढ़ें">18. शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग
पढ़ें">19. चोखेर बाली
पढ़ें">20. मसिजीवी
पढ़ें">21. ॥दस्तक॥
पढ़ें">22. दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिका
पढ़ें">23. कस्‍बा qasba
पढ़ें">24. Rudra Sandesh
पढ़ें">25. दीपक भारतदीप का चिंतन
पढ़ें">26. यूनुस ख़ान का हिंदी ब्‍लॉग : रेडियो वाणी ----yunus khan ka hindi blog RADIOVANI
पढ़ें">27. मेरा पन्ना
पढ़ें">28. महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar)
पढ़ें">29. जोगलिखी
पढ़ें">30. कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **
पढ़ें">31. रामपुरिया का हरयाणवी ताऊनामा !
पढ़ें">32. नारी
पढ़ें">33. समाजवादी जनपरिषद
पढ़ें">34. घुघूतीबासूती
पढ़ें">35. एक शाम मेरे नाम
पढ़ें">36. महाशक्ति
पढ़ें">37. दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिका
पढ़ें">38. दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!
पढ़ें">39. एकोऽहम्
पढ़ें">40. आवाज़
इस चालीसा के अलावा १०० से अधिक बिलागर जबलपुर के ही होंगे अभी 20-25 हैं मार्च के बाद 100 से अधिक होंगे
"बोलो नरमदा माइ की जय !!हर-हर नर्मदे !!"

7 टिप्‍पणियां:

  1. विचार तो बहुत अच्‍छा है और लगता है कि लोगों ने यदि 'स्‍वेच्‍छा' से इसे स्‍वीकार नहीं किया तो आप जबलपुरिया ब्‍लागर इस 'स्‍वेच्‍छा' का माडरेशन कर देंगे।
    'चालीसा' के बाकी सदस्‍यों को पता है या नहीं, मुझे नहीं मालूम किन्‍तु मुझे 'ओमती' के 'सूअर बम' के बारे में खूब अच्‍छी तरह पता है।
    सो, मेरी सहमति सबसे पहले दर्ज कीजिएगा।

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  2. आप उस वाकये को दिल से लगा लिए लगता
    है. अपने बिल्लोरे जी वैसे होते तो हम उनके दीवाने
    नहीं होते , रहा जबलपुर का सवाल तो यहाँ परसाई,
    का एक क्षत्र राज़ चलता है आज भी . यमराज भी
    आ जाएँ संतुलित शिला का संतुलन नहीं बिगाड़ सकते
    आप ओमती के भय से शामिल/सहमति न दें
    मुकुल जी का जीवन मैंने करीब से देखा है.....
    अकेले दम पर आभास को आभास बनाने का
    ज़बरदस्त माद्दा तो मैंने देखा सारा शहर जानता है
    नर्मदे हर हर

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  3. सादर-प्रणाम
    हम किसी के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते किंतु
    हमने जो सूत्र दिया था उससे यदि आपको कोई
    ठेस लगी तो हम दुखी हैं . वास्तव में मुझे
    इल्म ही न था कि क्रिया की इतनी बड़ी प्रतिक्रया होगी
    मैं सच्चे मन से तीन बार विष्णु.....विष्णु.....विष्णु.....!! कहता हूँ
    और प्रतिज्ञा करता हूँ कि किसी को कुछ भी न कहूंगा चाहे कोई मुझे
    कितना भी अपमानित करे , विष्णु जी सच कहूं "ईर्षोत्पादन" के परिणाम के कारण
    यह सब हुआ , किंतु इसमें कही साहित्य की कमीं न दिखी होगी मेरी और से .

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  4. जो पंगु गिरी को सहज ही लांघे तो मेरे रहबर बवाल होगा।
    खुदा के बन्दों से जाके कह दो - कमाल हूँ तो कमाल होगा ॥
    खुदा की रहमत से जो है रोशन दिया अंधेरी निशा का मेरी -
    उसी के कहने से ही बुझेगा, जो तुम बुझाओ कमाल होगा।।

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  5. बहुत बढ़िया संसद बनाई मुकुल भाई आपने मज़ा आ गया। सुन्दर प्रस्तुतिकरण।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!