एक स्वप्न सुन्दरी की कहानी :


गाल पे काला तिल था उसके। याद है सफ़ेद झक्क गोया मैदे से बनाई गयी हो . आशिकी के लिए इत्ता काफ़ी था मुहल्ले के लड़कों के लिए दिन भर घर में बैठी उस सुकन्या को मोहल्ले में आए पन्द्रह-बीस दिन ही हुए थे की सारे मुहल्ले के लोग खासकर ख़बर खोजी औरतें, ताज़ा ताज़ा मुछल्ले हुए वे लडके जो दस के आगे बस न पड़ सके न पड़ना ही चाहते थे.क्योंकि माँ-बाप की सामर्थ्य नहीं का लेबल लगा कर स्कूल न जाना ही उनका अन्तिम लक्ष्य था...... ताकि उनकी आन बान बची रहे , सुबह सकारे उठाना उनके मासिक कार्यक्रम में था यानी महीने में एकाध बार ही अल्ल-सुबह जागते थे.वरना ९ से पहले उनके पिता जी भी जगा न सकते थे. यानी कुलमिला कर बोझ घर में पिता पर बाहर लड़कियों पर.क्या मजाल की मुहल्ले की कोई लड़की इनके नामकरण यानी फब्तियों से बच जाए .अगर भूरी राजू से बचे तो कंजा राजू की फब्तियों का शिकार हो ही जातीं थी बेचारी . कंजा,भूरी,कंटर, तीन राजुओं के अलावा बिल्लू.मोंटी,गोखी,कल्लन,सुरेन,ये सारे के सारे कैरेक्टर मुहल्ले की फिजा में समकालीन पसंदीदा हीरोज़ की स्टाइल में रहा करते थे उस मोहल्ले में जहाँ कभी हम रहा रहे थे. ,
हाँ तो वो सुंदर लड़की को निहारने कितने जतन करते थे ये लडके . किंतु वो सफ़ेद झक गाल पर तिल वाली लड़की उनको देखने कम ही मिलती और जिसने उस लावण्या का दर्शन कर लिया तो समझिये कि दिन भर अन्य सारे लडके उसे घेर के खूबसूरती का विवरण पूछते.
काय...? आज तो .....
हओ... आज तलक हम नई देखी ऐसी लड़की ! बड्डा गज़ब है... रेखा को बिठा दो बाजू में तो रेखा फीकी पड़ जाहै...!
अरे घर से बाहर काय नई आती...?
"अरे,सुन्दरता पे डाका न डाल दें अरे तुम तो यार लड़की का तुमाए साथ कंचा खेलेगी कि पतंग उड़ाएगी बेबकूफ हो तुम इत्ती सी बात नई समझते "
तभी कंटर राजू बड़े स्टाइल से बोला :"सुनो रे अदब से बात करो तुमाई सबकी भाभी है साले अब कोई बोला तो...?"
तो क्या .......... बताएं का कित्ती लड़कियों को हमे भाभी बनाएगा साले....पटती एको नई बात तो सुनो शेख चिल्ली की साला आइना देख घर जाके
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रहस्यमयी उस सुकन्या को कितने लडके अपनी प्रेयसी मान बैठे थे .कोई गुरूवार उपासा रहने लगा था तो किसी ने ग्वारीघाट वाले हनुमान-मन्दिर में अर्जी तक दाखिल कर दी थी .कुल मिला कर अभीष्ट की सिद्धी के लिए इष्ट को सिद्ध कराने का ज्ञान सबके अंतर्मन में उपजाने लगा. उस लड़की के मुहल्ले में आते ही अन्य लड़कियों पर फब्तियां भी यदा कदा ही कसी जातीं थी. . सबका अन्तिम लक्ष्य "गाल पर काले तिल वाली लड़की को इम्प्रेस करना था "अब दीपा,माया,मीरा,मौसमी सब महत्त्व हीन हो गयीं थी
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होते करते आठ माह बीत गए एक दिन अचानक वो लड़की कहाँ गयी लडके इस सवाल को लेकर बेचैन अधीर हो रहे थे . कंजा राजू से रहा नहीं गया उस सुकन्या की माँ से पूछ ही लिया : "अम्मा जी, आप अकेलीं है बाबूजी .... इससे पहले कि कंजा बेटी के बारे में पूछता कि अम्मा जी की तनी भ्रकुटी देख अपना सा मुंह लिए गली पकड़ ली .
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दो साल बाद होली की हुडदंग में मोहल्ले के दस बारह लडके पुलिस के हत्थे चढ़ गए किसी के माँ बाप जमानत को आए तब सिपाही सबको हथकड़ी लगा के कलेक्ट्रेट के कमरा न 56 में पेश करने ले आया . रीडर ने जमानत पेपर की दरयाफ्त की . सबके चेहरों से हवाइयां उड़ रहीं थी कि सब डिविज़नल मजिस्ट्रेट की सुरीली आवाज़ ने उनको चौंका दिया "बाबू, साब इनकी जमानत मैं लेती हूँ "
साहिबा का कथन सुन युवक सन्न रह गए . एस डी एम मैडम की कृपा की उनको उम्मीद इस कारण भी न थी क्योंकि वही सुकन्या थी जिसके लिए कई जतन करते थे ये लडके .
रिहा होने पर भी लडके कमरे के सामने सर झुकाए खड़े थे .... मैडम जब निकलीं तो उनको भी ताज्जुब हुआ . एक क्षण रुक कर बोली : "अपना मार्ग तपस्या से बनता है न कि सपनों में खे रह कर ...! उस वक़्त मैं इसी परिक्षा की तैयारी कर रही थी . तुम्हारी राहें अभी बंद नहीं हुईं हैं अभी भी रास्ते खुलें हैं

4 टिप्‍पणियां:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!