नाम और यूं आर एल से टिप्पणी का जुगाड़...!!

" टिप्पणी लोलुप- वृत्तिसे ब्लागिंग के एक नए हथकंडे का खुलासा पिछले दिनों हुआ हुआ यूं कि एक आलेख पर मेरे द्वारा कोई टिप्पणी न किए जाने के बावजूद किसी स्नेही ने {संभावना इस बात की अधिक है कि स्वयं आलेखक ने ऐसा किया हो} मेरे यू आर एल तथा नाम का प्रयोग करते हुए टिपिया मारा किंतु उन महाशय ने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि ऐसा करना कितना ग़लत होगा .... इसके दुष्परिणाम क्या होंगे । इसी तरह कोई वाकया संगीता जी के ब्लॉग पर होने की ख़बर बवाल जी से मिली ।
मैंने अपना मामला तो एक सायबर ज्ञानी जी को रेफर कर दिया है। जो शीघ्र ही विस्तार से जानकारी भेजेंगे देखूंगा कि सायबर ज्ञानी अंकित की भेजी जानकारी में क्या खुलासा होता है ।
बहरहाल इस बात को यहीं विराम देते हुए एक रुचिकर समाचार की और आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा समाचार क्या आम ज़िंदगी से जुड़ी बात है कई बार मना करने के बावजूद बाबूजी ने मेरे ड्रायवर को निर्माल्य {पूजा से बचे फूलों } को नर्मदा नदी में विसर्जित करने की जिद्द पकड़ ली थी । बुजुर्गों को सीधे सीधे इनकार करना खतरे से खाली नहीं होता सो हमने उस निर्माल्य को अपने साथ लिया और चल पड़े तय शुदा व्यवस्था के तहत उस किसान परिवार के पास जिसने जैविक खाद के लिए "नाडेप संरचना तैयार कर रखी है। अपशिष्ट प्रबंधन के इस नायाब प्रयोग से मुझे भी बागवानी के लिए खाद मिलेगी अपने घरेलू गमलों के वास्ते माँ नर्मदा भी दूषित नहीं होगी हमारी अंध-भक्ति के कारण ।
सच छोटी छोटी सोच बड़े परिवर्तन की जनक होतीं हैं

4 टिप्‍पणियां:

  1. यार गुरू ये बहुत काम की चीज़ बता दी आपने निर्माल्य के बारे में। हम सोचते हैं सिलुआ के फ़ार्म-हाऊस पर निर्माल्य जैविक ख़ाद का काम ही स्टार्ट कर दिया जाए। क्या ख़याल है ?

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  2. हाँ, उस दिन 1st एप्रिल को मेरे नाम से किसी ने चिटठाचर्चा मं टिप्पणी की थी।
    मैंने जाँचा तो वह मेरे प्रोफ़ाईल तक नहीं जाती।पर है तो बात गम्भीर। हम कोई टिप्पणीकार का प्रोफ़ाईल लिंक चेक करके थोड़े उसकी टिप्पणी की पुष्टि करते हैं!

    खुलासाहम भी जानना चाहेंगे।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!