तक़रीर की एवज़ में रोटी ही दिखा देते ।।

तलाशा होता दिल से तो न कहते आप ये
कोई मिला ही नहीं जिस को वफ़ा देते ॥
कोई धोखा नहीं देता यही है फेर नज़रों का
क्यों हम सामने सबके हैं हाल ए दिल बता देते ॥
पत्थरो को सुनाया होगा ये ग़मगीन सा नगमा
महफ़िल को सुनाते तो महफिल को रुला देते।।
भूक से लड़ता रहा वो रात भर सोया नहीं
तक़रीर की एवज़ में रोटी ही दिखा देते ।।
हर पाँच बरस में दिखाते हो तमाशा
हम नंगे हैं हैं ये बात पहले ही बता देते ॥


12 टिप्‍पणियां:

  1. पत्थरो को सुनाया होगा ये ग़मगीन सा नगमा
    महफ़िल को सुनाते तो महफिल को रुला देते।।

    बहुत खूब। एक तकरीर ये भी-

    दूध की नदियाँ बहे या दूध में नदियाँ बहे।
    दूध है नदियाँ भी हैं फिर क्या कमी बतलाइये।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.

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  2. भूक से लड़ता रहा वो रात भर सोया नहीं
    तक़रीर की एवज़ में रोटी ही दिखा देते ।।
    बेहद भावुक कर गयी ये पंक्तियाँ.....

    Regards

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  3. समकालीन परिवेश पर केन्द्रित सुन्‍दर गजल। बधाई।

    -----------
    तस्‍लीम
    साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

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  4. आज तो शेर में लपेट लपेट के
    सटीक थोडा बहार से कमज़ोर

    उत्तर देंहटाएं
  5. हर पाँच बरस में दिखाते हो तमाशा
    हम नंगे हैं हैं ये बात पहले ही बता देते ॥

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  6. पत्थरो को सुनाया होगा ये ग़मगीन सा नगमा
    महफ़िल को सुनाते तो महफिल को रुला देते।।

    बहोत खूब....!!

    हर पाँच बरस में दिखाते हो तमाशा
    हम नंगे हैं ये बात पहले ही बता देते ॥

    बहोत सुन्दर....!!

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!