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12 अप्रैल 2009

तक़रीर की एवज़ में रोटी ही दिखा देते ।।

तलाशा होता दिल से तो न कहते आप ये
कोई मिला ही नहीं जिस को वफ़ा देते ॥
कोई धोखा नहीं देता यही है फेर नज़रों का
क्यों हम सामने सबके हैं हाल ए दिल बता देते ॥
पत्थरो को सुनाया होगा ये ग़मगीन सा नगमा
महफ़िल को सुनाते तो महफिल को रुला देते।।
भूक से लड़ता रहा वो रात भर सोया नहीं
तक़रीर की एवज़ में रोटी ही दिखा देते ।।
हर पाँच बरस में दिखाते हो तमाशा
हम नंगे हैं हैं ये बात पहले ही बता देते ॥


कितना असरदार

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