नेता जी की पुत्र वधु के लिए पद रिक्त न रखने के ....कारण

कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने की गरज से मीडिया की शरण में जाते हैं मीडिया को उस वक्त सत्यांवेषण के बगैर किसी भी प्रकार की राहत देना और अर्धसत्य को पूर्ण साबित करने में सहायता करने का चलन आजकल बेहद आम बात हो गई हैजबलपुर के मीडियामेन आपका अपना सत्यान्वेषण का एक स्तर है कृपया उसे बनाएं रखनें में आगे आयेंरिश्तेदारी और संपर्क का निर्वाह कर यदि युवा साथी मीडिया को आक्रामक रूप दे रहें हैं तो आने वाले समय में निष्पक्षता के लिए नई परिभाषा तय करनी होगी. मेरा संकेत स्पष्ट रूप से उन मीडिया कर्मियों के लिए है जो विगत १५ दिनों से कुछ स्वार्थियों की लफ़्फ़ाज़ियों को ब्रह्म-सत्य मान कर मेरे खिलाफ़ सक्रीय हैं. चूंकि ब्लागर के रूप में मैं भी एक मीडिया कर्मी ही हूं मेरा मानना है कि जब मैं सच उजागर करूंगा तो आप सभी नि:शब्द हो जाएंगें ............. मुझे आम आदमी की हैसीयत से यह कथन करने में जनहित के लिए कोई गुरेज़ नहीं है कि नियम कायदों को किसी के लाभ के लिये "तोडना" मेरी तासीर में नहीं है. अधिकारी के रूप में यदि मैने सुयोग्य महिलाओं को उनके अंकों के आधार पर अनंतिम रूप से चुनने के लिये वरीयता दी है तो उसके लिए मैं अपनी किसी भी कुरबानी के लिये तैयार हूं..... छल-कपट और आपको हथियार बना कर आपका उपयोग करना मेरे संस्कारों में भी नहीं. आप मे से शायद ही कोई ऐसे होंगे जिनसे मेरा व्यक्तिगत परिचित नहीं है सामान्यत: सभी से परिचित हूं .आप जानते हैं मेरे तुलसी-वन स्वच्छ जीवन अभियान को आप यह भी जानतें हैं मेरा गोद-भराई तथा जन्म-दिवस कार्यक्रम मध्य-प्रदेश सरकार नें महिला-बाल-विकास विभाग के ज़रिए "मंगल-दिवस" के रूप में स्वीकारा है .... किंतु आप सभी उन कुछ स्वार्थियों से अचानक गुमराह हो गए जिनकी अयोग्य रिश्तेदारिनों को नियुक्त करने अथवा नियम विरुद्ध काम करने से मैं असहमत हुआ हूं. यदि यह अपराध है तो मुझे बताएं आप सभी जनपद पंचायतों में हुई शिक्षा विभाग की नियुक्तियों से परिचित है............ आगे आप को कुछ भी बना सूरज को टार्च दिखाने जैसा मामला है........ अस्तु आपके सामने एक सत्य उज़ागर ज़रूर किए देता हूं कि "एक सम्माननीय जन-प्रतिनिधि महोदय की पुत्र वधू के लिए पद रिक्त न रख सकने के कारण वे कुपित हैं और आप उनका शस्त्र बन गए ........? "

1 टिप्पणी:

  1. अरे भाई बिल्लोरे.....भाई कान पकड़ता हूँ....!! उट्ठक-बैठक करता हूँ.....मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा यार....और किसी और ने कहा हो तो उसे मैं पकड़ कर लता हूँ.....तब तक के लिए ब्रेक... हा-हा-हा-हा-हा-हा-बुरा मत मान लीजो...अपन तो ऐसे ही हैं भैय्या.....!!

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!