राज़भाटिया जी का खजाना



भुले बिसरे गीत....


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आप की नयी पोस्ट १माही....कहीं... दर्द तो नहीं हुआ ? - दिल तोड़ कर मेरा, कहते हो - कहीं... दर्द तो नहीं हुआ ? मेरे ज़ख्मों पर छिड़क कर नमक, कहते हो - कहीं... दर्द तो नहीं हुआ ? इश्क को मेरे मार कर ठोकर, कह...

1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!