मोहम्मद बाउजीजी , एक ऐतिहासिक चरित्र


17 दिसम्बर 2010 को ट्यूनीशिया के मोहम्मद बउजीजी द्वारा आत्मदाह करने के पश्चात समस्त मध्य पूर्व में एक ऐसी राजनीतिक आँधी चली है कि अब तक उसने थमने का नाम नहीं लिया है। पहली बार जब उससे सम्बंधित कथा बताई गयी तो उसमें अनेक विसंगतियाँ थीं लेकिन अब जबकि अनेक तथ्य सामने आ चुके हैं और उसकी विरासत अधिक सुदृढ रूप से स्थापित हो चुकी है तो यह जान लेना उपयोगी होगा कि इस क्षेत्र में उथल पुथल का आरम्भ कैसे हुआ।

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( निम्नलिखित घटनाक्रम को अनेक माध्यमों और स्रोतों को लिया गया है विशेष रूप से वाशिंगटन पोस्ट के मार्क फिशर से जिनके अनुसार, ट्यूनीशिया में एक फल विक्रेता के कार्य से समस्त अरब जगत में क्रांति का आरम्भ हुआ)
ट्यूनीशिया के मध्य स्थित सिदी बाउजिद नामक शहर जो कि 40,000 जनसंख्या का शहर है और जिसकी अन्य कोई विशेषता नहीं है ( सिवाय इसके कि द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन और अमेरिकी सेनाओं के मध्य सिदी बाउजिद संग्राम में इसका नाम आया था) वह इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम का प्रमुख स्थल बना।
ट्यूनीशिया के अन्य स्थलों की भाँति इस क्षेत्र पर भी ज़िने एल अबीदीन बेन अली के शासन काल में सामान्य नागरिकों पर पुलिस का शासन था। मार्क फिशर ने इसे अत्यंत कलात्मक ढंग से वर्णित किया है, " विशेष रूप से वे उत्पादन बाजारों में जहाँ कि मोहम्मद बाउजीजी फल बेचा करता था अपने पिकनिक स्थल के रूप में मानते थे और बिना मूल्य चुकाये थैला भर फल ले जाते थे । पुलिसवालों को इस बात में आनंद आता था कि वे फल विक्रेताओं के साथ बुरा व्यवहार कर उन पर जुर्माना लादते थे , उनकी उत्पाद को जब्त कर लेते थे और यहाँ तक कि उनके बिके हुए फलों को भी पुलिस की कार में रखने को कहते थे" ।
26 वर्षीय बउजीजी जो कि बिना पिता के आठ सदस्यों के परिवार का अकेला भरण पोषण करने वाला अविवाहित था और उसे प्रतिदिन इस लूट से गुजरना होता था। 17 दिसम्बर के निर्णायक दिन प्रतिदिन की भाँति उसने अपने बिना लाइसेंस की लकडी की फल ठेलिया निकाली और उसे फल से भरकर प्रातः काल 10 बजे लेकर बाजार आ गया। दो पुलिस अधिकारी जिनमें से 36 वर्षीय 11 वर्षों से पुलिस सेवा में कार्यरत फादिया हमदी ( जिसे फेदिया हमदी का उच्चारण भी करते हैं) ने उनके फलों में अपना हस्तक्षेप आरम्भ कर दिया । बउजीजी के चाचा ने उसकी ओर से हस्तक्षेप करते हुए पुलिस अधिकारी को वहाँ से चले जाने को कहा। उसके बाद उसका चाचा पुलिस प्रमुख के पास गया और उनसे आग्रह किया कि वह पुलिस अधिकारी से बउजीजी के पास से चले जाने को कहे। पुलिस प्रमुख इस बात के लिये राजी हो गया और हमदी को बुलाकर उसे झाड लगाई और युवक को परेशान न करने की सलाह दी।
अधिकारी हमदी को क्रोध आ गया और वह फल बाजार में बउजीजी के पास गयी। उसने बउजीजी से एक टोकरा सेब लेकर अपनी कार में जब्त कर लिया। जब वह अधिक फल के लिये लौट कर आई तो बउजीजी ने उसके मार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास किया और बउजीजी के निकट के स्टाल में कार्य करने वाले अला अल दीन अल बदरी के अनुसार जब बउजीजी ने हमदी का मार्ग अवरुद्ध कर उसे रोकने का प्रयास किया तो उसने बउजीजी को धक्का दिया और अपनी पुलिस वाली बेंत से पिटाई भी की।
आवेश में हमदी ने बउजीजी के पास जाकर उसकी डंडा छीनने का प्रयास किया और जब उसने पुनः हस्तक्षेप किया तो हमदी और दो अन्य अधिकारियों ने बउजीजी को जमीन पर धकेल दिया। उन्होंने उसके अन्य उत्पाद और बिका हुआ सामान उठा लिया।
बउजीजी रोया, गिडगिडाया और मिन्नतें करता रहा, " आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? मैं तो एक सामान्य व्यक्ति हूँ और रोजगार करना चाहता हूँ"। उसके बाद 50 व्यक्तियों ने वह घटित होते हुए देखा जिसने कि समस्त मध्य पूर्व को आग की लपटों में ले लिया। हमदी ने बउजीजी के चेहरे पर तमाचा जड दिया।
अपमानित बउजीजी शहर के विशाल कक्ष में आधिकारिक शिकायत के लिये गया। उसे उत्तर नकारात्मक मिला उससे कहा गया कि सभी लोग बैठक में हैं, तुम घर जाओ , जो कुछ हुआ उसे भूल जाओ। उसने इस मामले को यहीं समाप्त करने के स्थान पर वापस लौटकर अपने साथ फल विक्रेताओं के समक्ष अपने संकल्प को जताया कि वह इस अन्याय और भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए आत्मदाह करेगा। अपने संकल्प को चरितार्थ करते हुए उसने अपने ऊपर करीब दिन में 11:30बजे ज्वलनशील पदार्थ छिडक लिया और उस पर माचिस लगा दी और स्वयं आगों की लपटों में घिर गया।
उसे बचाने के प्रयास हुए परंतु जिससे आग बुझाने का प्रयास हुआ वह काम नहीं आया। पुलिस को बताया गया लेकिन जैसा कि सम्भावित था कि कोई उत्तर नहीं मिला। प्रायः डेढ घण्टे के बाद एक एम्बुलेंस आई । बउजीजी पहले तो बच गया और उसे ट्यूनिस के निकट एक जले वालों की चिकित्सा करने वाले अस्पताल में ले जाया गया।
इसके साथ ही सिदी बाउजिद में दंगे आरम्भ हो गये और इन्हें वीडियो के सहारे फेशबुक पर चढाया गया और इससे मामला और भड्का और अव्यवस्था स्थानीय स्तर के बाद राष्ट्रीय स्तर तक फैल गयी। पुलिस अधिकारी हमदी को गिरफ्तार कर लिया गया। राष्ट्रपति बेन अली ने गम्भीर रूप से जले बउजीजी को 28 दिसम्बर को अस्पताल में जाकर देखा और उसके परिवार से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
4 जनवरी को गम्भीर रूप से जले होने के कारण बउजीजी की मृत्यु हो गयी । सिदी बाउजिद के निकट उसके अंतिम संस्कार में 5,000 लोगों की भीड एकत्र हुई और उन्होंने नारा लगाया, " मोहम्मद तुम्हें अंतिम बिदाई हम तुम्हारा प्रतिशोध लेंगे। आज हम तुम्हारे लिये रो रहे हैं लेकिन कल उन्हें रोना होगा जिनके चलते तुम्हारी मृत्यु हुई है" । उसका गुम्बद एक तीर्थस्थल बन गया।
निश्चित रूप से मोहम्मद बउजीजी का प्रतिशोध लिया गया। हताशा में उठाये गये उसके कदम से तो दो शासन उखाडे जा चुके हैं ( ट्यूनीशियाम मिस्र) दो गृह युद्ध ( लीबिया, यमन) भडक चुके हैं और दो सरकारें अस्थिर हो चुकी हैं (बहरीन , सीरिया) । इंटरनेट ने उसे ऐतिहासिक चरित्र बना दिया है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. मार्मिक किन्तु प्रेरणादायी

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  2. अन्याय से लड़ने वालों की अन्ततः विजय होती है।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!