उड़न तश्तरी से रू ब रू : ब्लागिंग पर समीर लाल

मशहूर ब्लॉगर श्री समीर लाल जी से हुई बात चीत में ब्लागिंग को लेकर हुई चर्चा का पहला एपीसोड सादर प्रस्तुत है.समीर लाल जी का मत है कि हिंदी ब्लागिंग अपने उच्च मुकाम पर पहुंचेगी ये तयशुदा बात है .
समीर लाल जी से हुई बात चीत सुनिए नीचे  और  संवाद एवं विमर्श पर  भी


71 टिप्‍पणियां:

  1. समीर जी और आपकी ये बात चीत बहुत अच्‍छी लगी .. आपके मध्‍य ब्‍लागिंग के बारे में बहुत अच्‍छी चर्चा हुई .. दो चार दिनों में मैं फिर से अधिक से अधिक ब्‍लोगों पर टिप्‍पणियां शुरू करना सोंच रही हूं .. दूसरी बैकअप वाली जानकारी भी मुझे बहुत अच्‍छी लगी .. मेरे बहुत सारे लेख की मैने अपने पास कोई कॉपी नहीं रखी है .. जल्‍द ही बैकअप रख लेती हूं !!

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  2. संगीता जी
    आपका आना महत्वपूर्ण है
    शुभ कामनाएं
    Girish Billore

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. समीर भैया ने शुरूआती दौर में हमारे साथ ब्लागिंग शुरू की और नियमित लेखन, पठन-पाठन और टीपांकन करते आए हैं। कई साथियों का हौसला बढ़ाया। अपनी रचनाओं से हमें कई बार गुदगुदाया और कभी रुलाया भी है। ऐसा इसलिए नहीं कि इन्हें मैं कोई लाइफ़टाइम एचीवमेंट अवार्ड देना चाहता हूं। वे पितामह लगते हैं।
    निःसंदेह बेहतरीन शख़्सियत और क़लम के धनी है समीर लाल।
    बातचीत रोचक लगी। हिन्दी ब्लागिंग के शुरूआती दिनों की यादें ताज़ा हो गईं।
    प्रस्तुतकर्ता गिरीश बिल्लौरे जी को हार्दिक धन्यवाद.

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  5. बहुत अच्छा लगा यहां पर बातचीत सुनना. समीरजी ने जितना समय और मेहनत हिंदी ब्लागिंग के लिये की है उतना किसी और द्वारा किया जाना असंभव लगता है.

    उडनतश्तरी अपने आप मे एक स्कूल है और हम उसी स्कूल के पास आऊट स्टुडेंट हैं.

    रामराम.

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  6. आज अपने आदरणीय गुरूजी से मिलकर बहत अच्छा लगा... अभी बातचीत सुन रहे हैं....

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  7. याहू ग्रुप के बारे में भी जान कर अच्छा लगा...

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  8. अच्छा! उस वक़्त सिर्फ १०४ ही लोग थे....?

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  9. हाँ! इंग्लिश में तो अनगिनत हैं....

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  10. लेकिन चाइना सिर्फ अपने ही देश में पोपुलर है....

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  11. हाँ! सब कुछ बाज़ार पर ही डिपेंड है...

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  12. समीर जी को इस तरह जानना बहुत ही अच्छा लगा. भारत ब्रिगेड का धन्यवाद.

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  13. पर्यावरण.... पर तो बहुत ही ज़रूरी है....

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  14. गुरु जी ने सही कहा.... हम तो अभी पांचवीं /छठी तक भी नहीं पहुंचे हैं....

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  15. सही कहा आपने....अभी primary स्कूल ही मान कर चलें....

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  16. सच कहा आपने गुरूजी .... छिद्रान्वेषी लोग छिद्र खोज ही निकालेंगे...

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  17. हाँ ! आरोप ...सुझाव ही होते हैं......

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  18. ठीक कहा आपने ..बुराई तो निकल ही आती है....

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  19. jee.... गुरु जी के देश प्रेम को मैं भी सैल्यूट करता हूँ...

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  20. हां! आभास को भी देख कर अच्छा लगा था...

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  21. पूरी वार्ता सुनी और बहुत ही रोचकता से परिपुर्ण और शिक्षाप्रद है. चमेली के फ़ूल का उदाहरण पसंद आया, वाकई बहुत सुंदर.

    रामराम

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  22. ओह! अमिताभ जी लाइन पर आ गए हैं.... होल्ड पर हैं अभी....

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  23. अभी थोड़ी शान्ति छाई है....लगता है अभी होल्ड पर हैं....

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  24. हाँ हाँ! नए सिरे से शुरू करिए...

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  25. मेरा भी नमस्कार कहिये अमिताभ जी से....

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  26. वार्ता बहुत ही रोचक लगी.

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  27. अरे महफ़ूज अंकल नाम्स्ते...ये क्या रनिंग कमेंट्री चल रही है?:) बहुत दिनों बाद दिखे?

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  28. एक मिनट... मेरा एक फोन आया है.... पौज़ पर लगा दिया है....

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  29. अरे! मकरंद ...आजकल टाइम ही नहीं मिल पा रहा है.... कल रामप्यारी भी नाराज़ हो रही थी....

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  30. यह फोन को भी इसी वक़्त आना था...

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  31. वाह आज पहली बार ये पोडकास्ट सुना, समीर जी की आवाज सुन कर और पूरी वार्ता सुनकर बहुत कुछ मालूम चलता है कि ब्लागिंग का इतिहास क्या है?

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  32. गिरीश भाई आपका ये नया प्रयोग बहुत ही अनूठा है और निश्चित रूप से आने वाले समय में ये एक ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रहा है , समीर जी का साक्षात्कार बहुत ही श्रवणीय और संग्रहणीय लगी , बहुत ही बढिया अंक रहा
    अजय कुमार झा

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  33. हाँ! फोन कट गया.... अब आगे बातचीत सुनते हैं....

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  34. अच्छा! मैं भी अब वर्ड पैड पर लिखूंगा....

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  35. बिलकुल सही कहा... पता नहीं लोग क्यूँ नराजगी पालते हैं... छोटे कमेन्ट पर....

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  36. हा हा हा हा हा .....सीचना तो पड़ेगा ही फूलों को.....

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  37. जी...हर आदमी मोटी चमड़ी का नहीं है....

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  38. जी...प्रोत्साहन बहुत ज़रूरी है.... मैं आप ही के पद चिन्हों पर चल रहा हूँ.... गुरूजी...

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  39. बिलकुल सही...कहा आपने...मामला खुन्नस का ही है...

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  40. ह्म्म्म हम्म हम्म....सही कह रहे हैं आप...

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  41. जी,... हिंदी के फैलाव से ही हिंदी को विज्ञापन मिलेगा....

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  42. जी...रीडरशिप बढ़ाना ज़रूरी है...

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  43. जी...अगर आर्थिक लाभ मिले तो फुल टाइम किया ही जा सकता है...

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  44. हाँ! टी.वी. पे वो विज्ञापन देख रहे हैं कि बाघ बचाइए ... इसके लिए ब्लॉग लिखिए..

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  45. विदेशों में ब्लॉग की स्तिथि जानकर अच्छा लगा...

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  46. ...जी...प्रिंट मीडिया का ही है... सही कहा आपने....

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  47. अरे! चिन्मय को ढेर सारा प्यार....

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  48. जी जी.... सिमित ही था उस वक़्त...

    अरे वाह! डेढ़ लाख लोगों का.....

    बहुत बहुत बधाई...

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  49. जी...मैं भी दो चार बार नहीं लिख पाता हूँ.... कंटेंट का ख्याल तो करना ही पड़ता है.... और आजकल तो टाइम की कमी बहुत हो रही है...

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  50. हां! ट्रैफिक में उतार चढ़ाव तो पोस्ट के आने पर ही होता है....

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  51. जी ...जबलपुर का पानी ही बहुत अच्छा है...

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  52. जी.... सेम्लानी जी को भी मेरा नमस्कार कहियेगा...

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  53. अरे! आप मार्च में नहीं आ पाएंगे....? मैं यहाँ पूरी तैय्यारी कर के रखा हुआ हूँ.... प्लीज़ आ जाइये ...

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  54. पर गुरु जी ...दिवाली बहुत दूर है...

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  55. जी मैं भी आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ....

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  56. बहुत अच्छी लगी यह बातचीत....

    गुरु जी को सादर प्रणाम ....

    आपका

    महफूज़....

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  57. संजीव शर्मा7 फ़रवरी 2010 को 10:00 pm

    महफूज़ जी तो पूरे सक्षात्कार में साथ साथ कमेंट करते रहे हैं, यह बड़ा अच्छा लगा.

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  58. It is a great honour ,indeed, to hear Sameer bhai speak on the subject of contemporary blogging. Sameer bhai is a real 'hardil azeez' personality in our blogosphere and i salute his endeavours and hard work for the cause of Hindi blogging.

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  59. वाह वाह मुकुल भाई क्या कहना! इस पॉडकास्ट इंटरव्यू का, कोई जवाब नहीं भाई। समीरलाल जी से आपका यह वार्तालाप अपने आप में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बहुत सी ऐसी बातें कहीं जो हिंदी ब्लॉगर्स के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। यहाँ भविष्य की बहुत सी संभावनाओं की बात की गई है, जो हमें प्रेरित भी करती है और सतर्क भी। आपका बहुत बहुत आभार इस रोचक और बेहतरीन साक्षात्कार के लिए।

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  60. बम्‍पर प्रस्‍तुति, इससे अच्‍छा कुछ और हो ही नही सकता।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!