पत्नी पर निबंध :

(डा विजय तिवारी किसलय जी से वाट्सअप पर प्राप्त नि:बंध सादर प्रस्तुत है इसके मूल लेखक को यदि कोई आपत्ति हो तो दर्ज करें वैसे हास्य पर किसी का कापी राईट नहीं होता जो भी इस लेख को सपत्नीक पढ़ेगा उस साहसी के नागरिक अभिनन्दन की योजना बन रही है )
      पत्नी नामक प्राणी भारत सहित पुरे विश्व में बहुतायत पाए जाती है.
प्राचीन समय में यह भोजन शाला में पायी जाती थी, लेकिन वर्तमान
 में यह शौपिंग मोल्स, theaters, व् रेस्तौरेंट्स के नजदीक विचरती
हुई अधिक पायी जाती है. पहले इस प्रजाति में लम्बे बाल, सुन्दर
आकृति व् पुरे वस्त्र प्रायः पाये जाते थे, लेकिन अब छोटे बाल,
अत्यन्त छोटे वस्त्र, कृत्रिम श्वेत मुख, रक्त के सामान होठ सामान्य रूप
से देखे जा सकते है. इनका मुख्य आहार पति नामक मूक प्राणी होता है.
भारत में इन्हें धर्म पत्नी, भाग्यवती, लक्ष्मी आदि नामो से भी जाना जाता है.
अधिक बोलना, अकारण झगड़ना, अति व्यय करना, इस प्रजाति के मुख्य
लक्षणों में से है. हालांकि इस प्रजाति पर सम्पूर्ण अध्यन करना संभव नहीं है,
किन्तु सामान्यतः इनके निम्न प्रकार होते है:-
१. सुशिल पत्नी - यह प्रजाति अब लुप्त होने की कगार तक पहुँच चुकी है.
इस प्रजाति के प्राणी प्रायः सुशिल व् सहनशील होते थे और घरो में ज्यादा
पाये जाते थे.

 २. आक्रमक पत्नी - यह प्रजाति भारत सहित पुरे विश्व में बहुत अधिक मात्रा में
पायी जाती है. ये अपनी आक्रामक शैली, व् तेज प्रहार के लिए जानी जाती है.
समय आने पर ये बेलन, झाड़ू व् चरण पादुका का उपयोग अधिक करती है.

 ३. झगडालू पत्नी - यह प्रजाति भी वर्तमान में सभी जगह पायी जाती है.
इन्हें जॊर से बोलना व् झगडा करना अत्यंत पसंद होता है. इनका अधिकतर
सामना "सास" नामक एक और अतंत्य खतरनाक प्राणी से होता है.

 ४. खर्चीली पत्नी - भारत जैसे गरीब देश में भी पत्नियों की ये प्रजाति निरंतर
बढती ही जा रही है. इनकी मुख्य आदतों में क्रेडिट कार्ड रखना, बिना विचार किये
खर्च करना और बिना जरूरत वस्तुऐ खरीदना है. इस प्रजाति के साथ पति नामक
 प्राणी को चप्पल में थका हुआ पीछे पीछे घूमते देखा जा सकता है.

 ५. नखरीली पत्नी - इस प्रजाति के प्राणी अधिकतर आइने के सामने देखी जाती है.
 इनके होठ रक्त के सामान लाल, नाख़ून बड़े बड़े, केश सतरंगी और चेहरा श्वेत पाउडर
 से लीपा होता है. इन्हें भोजन शाला में जाना और काम करना नापसंद होता है.

 चेतावनी - पति नामक प्राणी के लिए इस प्रजाति के प्राणी अतंत्य खतरनाक व
आक्रामक होते है. इन्हें साड़ी, गहने ,गिफ्ट्स, फ्लावर्स  आदि के द्वारा  केवल कुछ
समय के लिए ही नियंत्रित किया जा सकता है.
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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!