राखी...!!

शहर की रगों में जख्म

और ये शहर फ़िर सेतैयार

बाँटने को प्यार जी हाँ सिर्फ़ शब्द नहीं ये"सचाई" है...!

मैनें सीमा और शबनम दौनों सेराखी बंधवाई है....!!!

"मुकुल"

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी व सच्ची भावना वाली सचाई कही है आपने । प्रयास सराहनीय है ।
    घुघूती बासूती

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!