नार्मदेय ब्राह्मण समाज के स्नेह सम्मेलन में

वरिष्ठ नागरिक श्री काशीनाथ बिल्लोरे
ने अपने भाषण में कहा:-












मुख्य अतिथि पंडित राम कृष्ण बलवटे
की अभिव्यक्ति
नारम देव [नार्मदेय]ब्राहमण समाज में दहेज़ लिया जाना अपराध माना जाता है भारत में एक मात्र यही ब्राम्हण जाती है। गुजराती,मराठी,राजस्थानी,सभी सांस्कृतिक परम्पराओं को अपने में सजोये इस जाति के लोग साहसी,निर्भीक,जुझारू प्रकृति के होते है।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!