एक गीत मेरा


गिरीश बिल्लोरे "मुकुल"

3 टिप्‍पणियां:

  1. जी कम से कम कविता अलग से लिखकर दिखा देते टिप नही रही है तो मैं टीप क्या दूंगा
    आशा है ध्यान देंगे......

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!