विजय तेंदुलकर Vijay Tendulakar


महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे विजय तेंडुलकर(6 जनवरी 1928 - 19 मई 2008) को विरासत में साहित्य का सौंधा अनुकूल वातावरण मिला। कब नन्हे हाथों ने कलम थाम ली, खुद उन्हें भी नहीं पता था। 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। संघर्ष के शुरुआती दिनों में वे 'मुंबइया चाल' में रहे। 'चाल' से बटोरे सृजनबीज बरसों मराठी नाटकों में अंकुरित होते दिखाई दिए। 1961 में उनका लिखा नाटक 'गिद्ध' खासा विवादास्पद रहा। 'ढाई पन्ने' 'शान्तता कोर्ट चालू आहे', 'घासीराम कोतवाल' ने मराठी थियेटर को नवीन ऊँचाइयाँ दीं। नए प्रयोग, नई चुनौतियों से वे कभी नहीं घबराए, बल्कि हर बार उनके लिखे नाटकों में मौलिकता का अनोखा पुट होता था। कल्पना से परे जाकर सोचना उनका विशिष्ट अंदाज था। भारतीय नाट्य जगत में उनकी विलक्षण रचनाएँ सम्मानजनक स्थान पर अंकित रहेंगी। अपने जीवनकाल में विजय तेंडुलकर ने पद्मभूषण (1984), महाराष्ट्र राज्य सरकार सम्मान (1956, 69, 72), संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (1971), 'फिल्म फेयर अवॉर्ड (1980, 1999) एवं महाराष्ट्र गौरव (1999) जैसे सम्मानजनक पुरस्कार प्राप्त किए थे।
"http://hi.wikipedia.org से साभार , फोटो :-भास्कर से साभार लिन्क http://www.bhaskar.com/2008/05/19/0805190904_vijay_tendulkar.html

3 टिप्‍पणियां:

  1. विजय तेंदुलकर जी का जाना न सिर्फ़ मराठी नाट्य जगत की बल्कि हिन्दि की भी अपूर्णिय छति है. हिन्दि रंगमंच में उनके अनुदित नाटको का अच्छा खासा इतिहास है. मराठी में लिखने के बावजूद वे हिन्दि के ही से लगते हैं.

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  2. श्रृद्धांजलि एवम नमन.

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  3. विजय तेंदुलकर जी के निधन से हिन्दी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है मेरी और से नमन और श्रध्धांजलि

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!