"................सज्‍जनों की अनुपस्थिति से दुर्जनों को बल मिलता है।"




*यदि आपका सही ((संदेश एक ग़लत स्थान पर जाने से संदेशा अच्छा युक्ति संगत होने के बावजूद ग़लत ही होता है. विशेषकर आभासी विश्व में ज़रूरी है कि वास्तविकता के धरातल पर पहुँच कर ही कुछ कहा जाए .

*जो भी इंसान कुंठाएं पाल लेता है उसका जीवन उस रसीली बेर या नागफनी सा हो जाता है जिसकी स्वाद-रस-रंग-सुन्दरता पर तो सब मोहित हो जाते हैं किंतु सबके मन में एकबार विचार ज़रूर आता है कि काश इसके साथ कांटे न होते !
* मेरे मित्र राजू उर्फ़ आर डी मालवा की एक लोकोक्ति अक्सर सुनाकर सब को चौंका देतें है -"ऊंट पर बैठकर बकरी चराना सम्भव होता है"- ब्लागिंग भी एक जिम्मेदारी भरा काम है उसके लिए राजू का कहना है :-"पोर्या पटेली नारिया खेती नहीं होती" यानि जिम्मेदारी वाले कामों में से बचपना नहीं चलता ।
(संदेश:- आदरणीय विष्णु बैरागी जी की उक्ति इस ब्लॉग पर सादर अंकित किया )

15 टिप्‍पणियां:

  1. रंजना.
    त्वरित-एवं गंभीर टिप्पणि के लिए
    आभारी हूँ

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  2. सदाशयतापूर्वक अिप्‍पणी करते-करते क्‍या मैं किसी राजनीति का हथियार बन रहा हूं?

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  3. .....और आजकल सज्‍जन दुर्जनों के पास फटकना भी नहीं चाहते....इसलिए तो उन्‍हें और बल मिल रहा है।

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  4. aaj apni oukaat dikha thi mai to apko bahut achcha manata tha . khualakar samane aao jiski kalam me dam hogi vah jeet jayega .

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  5. विष्णु बैरागी जी
    सादर-अभिवादन
    स्वागत है संयोगवश यही हो गया जो न होना था हो गया
    आप इसे अन्यथा न लीजिये कई बातें कभी कभी हो ही जातीं हैं
    आपको मित्र के ब्लॉग की भाषा समझने में थोडा सा विलंब हुआ
    आक्रोश में कोई कुछ भी कर सकता तै कई दिनों से मैं भी इग्नोर
    कर रहा था किंतु मित्र ने अभद्र शब्दों का उल्लेख किया
    शुरू किया तो ज़रूरी था टिप्पणी भी मुझे आहात कराने वाली देख आपको
    लगा होगा मैं दुर्जन हूँ सो मैंने पोस्ट लिख दी . किंतु पोस्ट का सार गंभीरता से देखिये
    कुछ अच्छा ही मिलेगा
    पुन: सादर
    आपका ही गिरीश बिल्लोरे "मुकुल"
    जबलपुर

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  6. Blogger महेंद्र मिश्रा said...

    aaj apni oukaat dikha thi mai to apko bahut achcha manata tha . khualakar samane aao jiski kalam me dam hogi vah jeet jayega .

    2 February, 2009 10:16 AM
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    मिश्रा जी
    अब आप मुझे बुरा समझ रहे हैं तो कोई आपत्ति नहीं
    मुझे तो बस आपके ऐसे ही मार्गदर्शन की ज़रूरत है
    जिससे सार्थक लेखन के लिए मुझे बल मिले .
    रही बात आपकी धडाधड आ रहीं आक्रोशी
    पोस्टों की सो स्वागत योग्य है यह आपका अधिकार
    है लिखिए पर बार-बार मुझे विषय वस्तु बनाने से आपके
    लेखन पर लोग अंगुली उठाएंगे की मिश्र जी के पास विषय
    नहीं बचे ...... बड़े भईया......"और भी बुराइयां हैं देश-दुनिया में मेरे अलावा
    आप एक सम्मानित ब्लॉगर हैं खुल के लिखिए उन सब पर भी रहा मेरा सवाल
    तो जब आपको लगे कभी कि मुझपर लिखना ज़रूरी है तो महीने दो महीने में
    एकाध पोस्ट दाल दिया करें मेरे ख़िलाफ़ ताकि लोग मुझमें बुराई कोजाने मेरे ब्लॉग पर
    पधार जाएँ भाई साहब मुझे अकारण रोज रोज प्रसिद्द न करें''

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  7. आपके लेखन को पढ़कर प्रतीत होता है कि आप मानसिक रूप से भी विकलांग है जो कलम भी विकलांग हो गई है यह आपकी पोस्ट खुन्नस निकाल रही है यह साबित हो रहा है . कभी माफ़ी मांगते हो कभी बुराई करते है यही आपका व्यक्तिव और कृतित्व है .

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  8. बन्धुवर, हम मसला कुछ नहीं जानते और न जानना चाहते हैं लेकिन ई अंदाज बहुत बचकाने हैं। आपस के मतभेद/झगड़े बैठकर निपटाओ। चाय पियो,पिलाओ। मस्त हो जाओ!

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  9. अनूप जी का अनुभवी आदेश सर माथे
    अब आगे से इस विषय पर कोई बात न लिखूंगा
    सादर अभिवादन

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  10. संदर्भ नही मालूम मगर दुखद है !

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  11. anoop ji
    Vade ka pakkaa hoon
    chay par bula ke hee
    dam loong
    apase ek vada kiyaa hai amal zaree hai

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  12. Are vah
    prakaran samaapt
    sundar baat
    is vivaad ne ek kaam achchha kiyaa blogars ko post or tippani ka anusasan sikha diya
    hamen bhee "T" par bulaaen
    aapase mil kar khushee hee hogee
    mujhe lagata hai ki apake saath koi .... khair chhodie sab chaltaa hai

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!