प्रतियोगिता पर आपत्ती आने लगी है

मित्रों सभी जानतें हैं की ब्लागिंग में आजकल क्या हो रहा है विनोद भाव से एक सार्थक लेखन को चित्रित करने की कोशिश को इतना नकारात्मक लिया की मुझे अपनी दौनों पोस्ट हटानी पड़ीं इतनी ज़्यादा नकारात्मकता की उम्मीद मुझे ब्लागिंग जगत से नहीं थी
ये पोस्ट क्रमश:
एक:इन ब्लॉगर जी को पहचानिये और इनाम में पाइए "*मुफ्त-टिप्पणियाँ "
दो:रिजुल्ट आ गया ...... पहचानिये और इनाम में पाइए थीं इसके जो भी अर्थ लगाएं जावें मुझे लग रहा है कि सोच में नकारात्मकता को स्वयं भगवान् भी नहीं मिटा पाए
एक दिन प्रभू विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा;-" एक विप्र को जो अमुक देश- भाग का निवासी है उसे संतुष्ट करना मुझे कठिन लग रहा है आप मदद कीजिए ? लक्ष्मी तैयार हो गयीं और फ़िर उस विप्र को इन्द्र से कह कर स्वर्ग के सभी सुख स्वर्ग में सम्मान से लाकर दिए गए .
महालक्ष्मी ने स्वयं बिदाई दी और फीड बैक चाहा ........... विप्र ने कहा : माँ........... इतना भी ठीक नहीं
मित्रों नकारात्मकता की जय है अत: शेष चकाचक अब कोई और फोटो तलाश रहा हूँ

10 टिप्‍पणियां:

  1. चलता रहता है सब! अपना काम जारी रखें. शुभकामनाऐं.

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  2. मामला क्या था भाई -आपने पोस्ट तक हटाई मुझे खबर तक न आयी ! बहरहाल समीर जी का मानिये !

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  3. kahne waale kahte rahege ... aap mast hokar mast haathi ki tarah chalte rahe....

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  4. भाई-साहबान
    सादर अभिवादन
    हुआ यूं जैसे ही मैं एक विवादित पोस्ट निकाल रहा था कि आज मुझे भगवान जी दिखे डेस्क टॉप पर तैरती उनकी छवि मैं मोहित सा उनको मन्त्र मुग्ध हो देख रहा था वे बोले:- प्रिय-भक्त क्या निहारते हो..?
    हम बोले भगवन बस आपके किरीट को निहार रहा था ?
    भगवान जी बोले:- प्रियवर शुद्ध स्वर्ण निर्मित है , चोरी/डाके का भाव लिए हो मन में
    मैं : - भगवन, घोर पाप मेरे मन में तो यह भाव था कि इस स्वर्ण का भाग्य देखिए प्रभू ने मस्तिष्क पर स्थान दिया है / आपके प्रश्न से लग रहा है मस्तिष्क में स्थान दिया है आप भगवान हो ही नहीं ?
    मेरे वाक्य को सुन प्रभू चकराए बोले "मैं विष्णु हूँ सृष्टि का सृजेता कैसी बात कर रहे हो ?" एक ............विराम के बाद प्रभू बोले :अरे, मैं किस मायावी प्रदेश मैं हूँ ?
    मैंने कहा:प्रभू आप वर्चुअल प्रदेश मैं विचर रहें हैं . यहाँ जो भी होता है आभासी होता है ...! हे भगवन, यह अंतर जाल है इसमें हटमल यानी html नामक जीव का राज है जो आप का नहीं मानव सृजित है .
    मुझे याद आया डेस्कटॉप के लिए डाउनलोड किये गए भगवान् हैं जिस भाव से निर्माणकर्ता ने इनको बनाया होगा उसी की प्रतिध्वनि मुझे सुनाई देगी ...........और .........बस अपन ने पोस्ट डिलीट कर दी और शुरू हुई नई बहस

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  5. kya sir itnee mushkil se to ghus ghusa kar aapkee paheli mein jabran ghus kar hit hone kee kosish kee thee, aapne post hee hata dee...kaun thaa wo bataaiye...aglee pahelee usee par ho jaaye....

    chhodiye sir ..lage rahiye.....

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  6. मुझे लगता है एक पुरानी कहावत take it easy लोग भूल गये है

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  7. सभी का आभार किन्तु ये बताइये सुना है कुछ लोग "रेकेट चला रहे हैं ?"
    सहमत हों तो मेसेज ऑप्शन में जाकर टाइप कीजिये blogREC spes yes / असहमत हों तो no लिख कर सेंड करिए 420420 पर .
    भई कब तक चलेगी ये टांग खिचाई ?
    समीर भाई,अरविन्द जी,अर्श भाई,रजनीश जी,डाक्टर मनोज जी ,कोकास जी और अजय भाई सच बताऊँ मैंने इस लिए वो पोस्ट ड्राफ्ट में डाल दी है क्योंकि आज ही पाया "कथ्य और कृत्य" के बीच का अंतर . किसी ने सही कहा है "आभासी जगत में शब्द का खोखला पन उजागर करते लोग केवल आत्म मुग्धावस्था में हैं "

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  8. भाई जी किस-किस की सुनेंगे. अपना काम जारी रखिये. पहले ही सोच समझ कर कार्य करे, किसी की टिप्पणियो के कारण अपने पोस्ट को हटाना कम से कम मेरे विचार मे अपनी ही अस्थिरता को प्रकट करता है. मधुशाला की ये पंक्तियाँ शायद ऐसे ही लम्हो के लिये है-
    करे कोई निन्दा दिन-रात,
    सुयश का पीटे चाहे ढोल.
    किये कानो को अपने बन्द,
    रही बुल-बुल डालो पर डोल.
    सुरा पी मधु पी..... कर मधु पान.

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!