बवाल की चट-पट (मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं.....)

चट :- मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं (ब्लौगवाणी पर एक ख़बर)
पट:- भई, ये तो बाबा आदम के ज़माने से साबित है, कमाल है ! आप तक ख़बर अब पहुँच रही है मियाँ ?

3 टिप्‍पणियां:

  1. देर आये दुरूस्‍त आये, अच्‍छा हुआ हूरो के पास पहुँचने से पहले पहुँच गई :)

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!