सांध्य दैनिक यशभारत का सहयोगी रुख हिन्दी ब्लागिंग के लिए


जबलपुर से निकालने वाला सांध्य दैनिक यशभारत इन दिनों निरंतर हिन्दी ब्लागिंग पर कार्य कर रहा है. आज जब इस अखबार ने एक महत्त्व पूर्ण पोस्ट का प्रकाशन किया तो मुझे लगा कि पोस्ट हू ब हू मुद्रित करना ठीक है किन्तु इस पर चर्चा करना ज़्यादा ज़रूरी है. ताकि प्रिंट मीडिया के पाठकों को ब्लॉग जगत में चल रही गतिविधियों से परिचित कराया जावे. इस हेतु यश्-भारत-परिवार के प्रबधन/स्वामित्व  से जुड़े श्री आशीष शुक्ल जी का मानना है  कि हम "इस विधा के महत्त्व से परिचित हैं तभी तो हम चिट्ठा कारिता को स्थान दे रहें हैं. संपादक जी ने भी ब्रिगेडियर बवाल से प्रकाशनार्थ सामग्री के लिए आग्रह किया है. वहीं आज दिनांक ३ जनवरी २०१० को जिन चिट्ठों के चर्चा यश भारत में हुई उसकी चर्चा ब्रिगेडियर पाबला करने जा रहें हैं =>"यहाँ "
आप में से कोई अगर अपना आलेख भेजना चाहतें हैं तो कृपया अपना आलेख जो किन्हीं ब्लाग्स से सम्बंधित   अपना आलेख yashbharat_press@yahoo.co.in /मेरे  अथवा बवाल के मेल पते पर भेज दीजिये .
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                 न्यूज़ -फ्लेश  
राजीव  तनेजा  साहब  ने किन किन के चेहरे सुधारें
हैं जानने क्लिक कीजिये =>;यहाँ   
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14 टिप्‍पणियां:

  1. यश भारत का साधुवाद..अच्छी खबर है.

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  2. ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

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  3. सच में बढ़िया समाचार दिया आपने..धन्यवाद!!

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  4. गिरीश जी-आपने अच्छी जानकारी दी है, आपका कार्य अभिनंदनीय है। आभार

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  5. आप सभी का हार्दिक स्वागत है
    जो टिप्पणियां देने आए जो आ रहें हैं तुरंत आ जाएँ
    कसम से बाबा टिपोर चाँद का आशीर्वाद से आपका ब्लॉग भी भरी-पूरी
    सुहागिन सा दमकता चमकता दिखेगा
    "अखंड टिपण्णी वता/वती भवेत !!"

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  6. यह सकारात्‍मकता की बढ़ता कदम है, हिन्‍दी चिट्ठाकारी सार्थकता की ओर जाये तो इससे बेहतर क्‍या हो सकता है। दैनिक यश भारत और इसमे प्रत्‍यक्ष और परोक्ष सभी लोग बधाई के पात्र है।

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  7. वाह वाह मुकुल भाई मज़ा आ गया। ललित जी को हम उनकी इसके बाद वाली पोस्ट पर सूचना उसी दिन दे आए थे। यहाँ आपके साथ मिलकर बधाई देते हैं और पाबला जी को धन्यवाद।
    मगर भैये उसी के ऊपर उसी पेज पर अरविंद मिश्रा जी की साँप वाली पोस्ट भी तो है उन्हें भी तो ख़बर में लाइए।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!