बाल गीत: भारत माता --संजीव 'सलिल'

बाल गीत:

भारत माता

संजीव 'सलिल'


मदर इंडिया, भारत माता,

जयकारा मेरे मन भाता

हिन्दी-अंग्रेजी का लड़ना-

मुझको बिल्कुल नहीं सुहाता.

दुनिया की हर भाषा-बोली,

बच्चों की होती हमजोली.

ज्ञान-ध्यान की बात बताएं,

सीख-सिखाएं खुशियाँ पायें.

हम अनेक फ़िर भी हैं एक,

कभी न खोये स्नेहिविवेक.

लिख,पढ़,बढ़ सबको सुख देंगे'

पीड़ित के आंसूं पोछेंगे.

मेहनत ही है सच्ची पूजा.

नहीं साधना का पथ दूजा.

'सलिल' हाथ से हाथ मिलाकर,

हंस तू सबको गले लगाकर...

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3 टिप्‍पणियां:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!