28/02/2010 को जबलपुर में निकल रही रसरंग बरात का न्यौता

रसरंग बरात का न्यौता बांटने निकले भाई रमाकांत गौतम ने सभी आज सभी ब्लागर्स का पता पूछा सो मुझे परिणय पाती  के समय पर आप तक डाक से पहुंचाने की दिक्कत भांप ली अस्तु आप सबको तीन सौ से अधिक जोड़ों की बरात हेतु पाती भेज रहा हूँ जो गुंजन कला सदन जबलपुर के डाक्टर आनंद तिवारी सुरेश सराफ,ओंकार श्रीवास्तव की और से 
इस में 10 वर्ष  से 99 वर्ष तक के दूल्हे देखने को आसानी से मिल जावेंगे . 
दूल्हे घोड़े,गधे,रिक्शे,तांगे,बैलगाड़ीयों,तथा पैदल अपनी प्रिया को वरने के लिए जाने वाले हैं. 
 
 
नोट:- यह बरात १९९१ से लगातार निकल रही है जो ब्लॉगर दूल्हा बनने का शौक रखतें हैं तुरंत टिकट कटा लें जबलपुर का . ब्लागराएँ भी दूल्हा ही बनाई जावेंगी

3 टिप्‍पणियां:

  1. हम भी आ जायें क्या सोच रहे हैं ।

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  2. काश!! पहुँच पाते...अनेक शुभकामनाएँ.

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  3. पहले देखी है कई मर्तबा बाराती बनकर। मगर इस बार नागपुर में ही अटक गए और १ की सुबह पहँचे जबलपुर, सो वंचित उस सुन्दर रसरंग बारात से।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!