माटी की गागरिया..के गीतकार स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी का स्मरण........

 माटी की गागरिया.........
के गीतकार स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी का स्मरण  दिला कर कमाल किया बवाल ने 
इस रिकार्डिंग की ख़बर बवाल को भी नहीं है 

2 टिप्‍पणियां:

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  2. सच कहा आपने इसकी ख़बर हमको क्या किसी को भी नहीं।

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!