राम नवमी पर विशेष: श्री राम भजन:बाजे अवध बधैया --स्व. शांति देवी वर्मा

बाजे अवध बधैया

बाजे अवध बधैया, हाँ-हाँ बाजे अवध बधैया...

मोद मगन नर-नारी नाचें, नाचें तीनों मैया.
हाँ-हाँ नाचें तीनों मैया, बाजे अवध बधैया..

मातु कौशल्या जनें रामजी, दानव मार भगैया
हाँ-हाँ दानव मार भगैया, बाजे अवध बधैया...

मातु कैकेई जाए भरत जी, भारत भार हरैया
हाँ-हाँ भारत भार हरैया, बाजे अवध बधैया...

जाए सुमित्रा लखन-शत्रुघन, राम-भारत की छैयां
हाँ-हाँ राम-भारत की छैयां, बाजे अवध बधैया...

नृप दशरथ ने गाय दान दी, सोना सींग मढ़ईया
हाँ-हाँ सोना सींग मढ़ईया, बाजे अवध बधैया...

रानी कौशल्या मोहर लुटाती, कैकेई हार-मुंदरिया
हाँ-हाँ कैकेई हार-मुंदरिया, बाजे अवध बधैया...

रानी सुमित्रा वस्त्र लुटाएँ, साड़ी कोट रजैया
हाँ-हाँ साड़ी कोट रजैया, बाजे अवध बधैया...

विधि-हर-हरि दर्शन को आए, दान मिले कुछ मैया
हाँ-हाँ दान मिले कुछ मैया, बाजे अवध बधैया...

'शान्ति'-सखी मिल सोहर गावें, प्रभु की लेंय बलैंयाँ
हाँ-हाँ प्रभु की लेंय बलैंयाँ, बाजे अवध बधैया...


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1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!