एक दर्द बयां करती टिप्पणी



सेG.N. J-puri
कोgirishbillore@gmail.com
दिनांक२८ मार्च २०१० ४:५० PM
विषय[भारत-ब्रिगेड] जबलपुर के बारे में पूछ कर बहुत हत प्रभ किया पाबला ... पर नई टिप्पणी.
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विवरण छिपाएं ४:५० PM (19 घंटों पहले)

G.N. J-puri ने आपकी पोस्ट " जबलपुर के बारे में पूछ कर बहुत हत प्रभ किया पाबला ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

यह नाम बदलने का झंझट छोडो, और नेतागिरी से असली मुद्दों पर आओ.

जबलपुर में चौबीसों घंटे लगभग हर एक मंदिर पर लाउडस्पीकर पर बेसुरी रामचरितमानस चलती रहती है, मंदिर ख़रीदे बेचे जाते हैं. हिन्दू धर्म के नाम पर चल रही इस गुंडागर्दी और धंधे को बंद कराओ.

गर्मी में ही नालियाँ चोक हो रही हों बदबू मार रही हों. तालाब और झील मिटाकर बिल्डर माफिया बिल्डिंगें तान रहा हो.

नगर निगम का कचरा सुबह सुबह सारे शहर में जलाया जाता है, (राईट टाउन और स्नेह नगर में भी). पोलीथिन जलने से ज़हरीला धुँआ सुबह से लोगों की सांस में जाता है. नगरनिगम के लोगों ने खुद कचरे का कोन्त्रक्ट ले रखा है, खुद ही चोर खुद ही दरोगा. इसके खिलाफ आवाज़ उठाओ.

कलेक्टोरेट में दलालों, कमीशनखोरों और घूसखोरीका किस कदर शिकंजा है, कभी जाकर देखो. कलेक्टर भी इनसे डरता है. यह समाप्त करवाओ.

जबलपुर के बिल्डर माफिया, डेरी माफिया के खिलाफ आवाज़ बुलंद करो.

भारत का सबसे प्रदूषित शहर है जबलपुर. दमा और ब्रोंकाइटिस महामारी की तरह फ़ैल रहा है, इसे कम कराओ. कम से कम शहर और उसके आसपास सघन वृक्षारोपण अभियान छेड़ दो. हरित जबलपुर २०२०.

और भी हजारों मुद्दे हैं.

पर नहीं हमें फ़ालतू के मुद्दों पर नेतागिरी करना है. क्योंकी इन सबके खिलाफ अगर आवाज़ उठाई तो क्या होगा यह "जबालीपुरम" वाले अच्छे से जानते हैं. इसीलिए शिगूफे छोड़ते रहो. लगे रहो!



G.N. J-puri द्वारा भारत-ब्रिगेड के लिए २७ मार्च २०१० ११:५० PM को पोस्ट किया गया

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!