दीपावली की हार्दिक बधाइयां



तपस्या कीजिये मैं  तो
तापस भाव भर दूंगा !
तिमिर जब छाएगा –
उजेले राहभर दूंगा

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2 टिप्‍पणियां:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!