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मयकदा पास हैं पर बंदिश हैं ही कुछ ऐसी ..... मयकश बादशा है और हम सब दिलजले हैं !!
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26 अक्टू॰ 2011
15 अग॰ 2011
लोकतंत्र को आलोक तंत्र बनाने की कवायद
लोकतंत्र को
आलोक-तंत्र बनाने की कवायद करता.
भारत पैंसठ साल का बुड्ढा.. हो गया..
अपनी पुरानी यादों में खो गया.......!!
दीवारों पर कांपते हाथों से लिख रहा था
"आलोक-तंत्र"
लोग भी आये आगे
बूढ़े का मज़ाक उड़ा कर भागे..!!
कुछ खड़े रहे मूक दर्शक बन ..!
कुछ गा रहे थे बस हम ही हम..!!
कोलाहल तेज़ हुआ फ़िर बेतहाशा
हर ओर नज़र छाने लगी निराशा !
सबकी अलग थलग थी भाषा-
कांप रही थी बच्चों की जिग्यासा !!
कल क्या होगा.. सोच रहे थे बच्चे
एक बूड़ा़ बोला :-"भागो किसी लंगड़े की पीठ पे लद के ही "
जान बचाओ.. छिप छिपाकर..
हमें नहीं चाहिये न्याय,
क्या करेंगें स्विस का पैसा लेकर
फ़हराने दो उनको तिरंगा ये
है उनका
संवैधानिक अधिकार...
रामदेव..अन्ना... सब कर रहे
शब्दों का व्यापार..
अरे छोड़ो न यार
फ़िज़ूल में मत करो वक्त बरबाद..
गूंगे फ़रियादीयो कैसे बोलोगे
बहरी व्यवस्था की भी तो कोई मज़बूरी है
वो कानों से देखेगी...!!
सदन में चीत्कारेंते हैं..
हमारे लिये हां..ये वही लोग हैं जो
सड़क पर दुत्कारतें हैं...
पूरे तो होने दो पांच साल
बदल देना
इस बरगद की छाल...
अभी चलो घर चलतें हैं..
24 फ़र॰ 2011
सच तुम जो भी हो आभासी नही
| साभार : ब्लॉग "लाइफ" से |
भोली भाली बातें
सुन
बन जातीं हैं रातें लम्बी रातें
तुम कौन हो ? क्यों हो ?
इस आभासी दुनिया
के उस पार से
जहां एक तिनके की आड़ लेकर
देख रहीं हो कनखियों से
कह देतीं हो वो
जो
कलाकार गढ़तें है
वही जो गीतकार रचते हैं
फ़िर भी खुद से पूछता हूं
कल पूछूंगा उनसे तुम कौन हो ?
सच तुम जो भी हो आभासी नही
प्रेम की मूर्ति
हां वही हो जो
गढ़तें हैं लिखते हैं
कलाकार गीतकार
27 जन॰ 2010
उनने मीट की है किसी रियासत पे हमला बोला क्या.............?
'' छत्तीसगढ़ ब्लॉगर बैठक संपन्न, एक रपट: "बांच के मन अति प्रसन्न है . फोन पे कानाफूसी हुई थी कि खाना कैसा बना, किधर मीट हो रही है आदि आदि, किन्तु व्यक्तिगत सह सरकारी व्यस्तताओं के चलते कोई . प्रतिक्रिया न दे सका. संजीत ने कुछ ऐसा नहीं लिखा जिससे ब्लागर्स मीट में कोई संवैधानिक संकट खड़ा हो...! किन्तु फिर भी डोमेन को लेकर जो भी बात पाबला जी ने रखी शायद यह उनका गलत कदम था सुकुल जी की सलाह देखिये कित्ती ज़बरदस्त है :-''लेकिन एक शिकायत यह भी है कि रायपुरिये क्या अपने गुरु/चेला (अनिल पुसदकर/संजीत त्रिपाठी) का घर बसाने के बारे में कुछ क्यों नहीं सोचते! यह भी जरूरी काम है।''
सच किसी के घर बसाने की कित्ती उम्दा सलाह है .............. मुझे मज़ाक सूझ रहा है सो कहे देता हूँ कि घर न होंगे तो बिखराव किसका होगा सो ज़रूरी है घर हों न हों तो बसायें [बुन्देली में बसायें के अन्य अर्थ भी हैं....!] ताकि उनको तोडा जा सके.
पता नहीं पाबला जी को क्या हो गया डोमेन खरीदे फिर उसे नीलाम करने उतारूं हैं..... ? भला कोई क्यूं खरीदेगा
सुकुल जी साफ़ कर चुके हैं ''चिट्ठाचर्चा.कॉम जिन लोगों ने खरीदा उनसे अनुरोध है कि वे इसका सही में चर्चा करने में उपयोग करके दिखायें। चर्चा में वह काम करके दिखायें जो इससे पहले कभी नहीं हुये। किसी नीलामी में भाग लेने का हमारा कोई इरादा नहीं है।''.............सुकुल जी का स्टैंड साफ़ है अब कोई बात ही नहीं रह गई.
देखिये सुकुल जी कितने स्पष्ट हैं :-'झटकों में ऊर्जा होती है.उसका सदुपयोग किया जाना चाहिये.
इस महान वाक्य को 24 /01 के सन्दर्भ में देखें तो स्थिति गड्मगड प्रतीत हो रही है . झटका किसे मिला इस बात का पता लगाया जा रहा है. ...जब तक इसका पता नहीं जाता तब तक आप इस बात पर विचार कर सकतें हैं............कि ''उनने मीट की है किसी रियासत पे हमला बोला क्या.............?''
जे बात कई लोग कह रहे हैं
इस बीच आपको बता दूं कि बवाल की नानी जी का देहावसान 22 जनवरी 2010 को हो गया तथा डाक्टर मलय जी की सहचरी का भी निधन 24 जनवरी 2010 को गया है. #
ॐ शांति शांति शांति ''
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