मैथिली हाइकू : संजीव 'सलिल'

मैथिली हाइकू :
संजीव 'सलिल'
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स्नेह करब
हमर मन्त्र अछि।
गले लगबै।
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एहि  दुनिया
ईश्वर बनावल
प्रेम सं मिलु।
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सभ सं प्यार  
नफरत करब
नs  ककरा से।
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लिट्टी-चोखा
मधुबनी-मैथिली
बिहार गेल।
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बिहारी जन
भगाएल जात
दोसर राज।
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चलि पड़ल
विकासक राह प'
बिहारी बाबू।
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चलय लाग
विकासक बयार
नीक धारणा ।
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हम्मर गाम
भगवाने के नाम
लsक चलय।
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हाल-बेहाल
जनता परेशान
मंहगाई सं।
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लोकतंत्र में
चुनावक तैयारी
बड़का बात।
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1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!