’’महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए चौथे स्तम्भ ने अपनी भूमिका पहचानी’’



    संभागीय उपसंचालक महिला सशक्तिकरण,जबलपुर संभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में महिलाओं के अधिकारों ,उनके लिए बनाए गए मौजूदा कानूनों,शासकीय कार्यक्रमों एवं योजनाओ जैसे लाड़ली लक्ष्मी, स्वगतम लक्ष्मी,लाडो अभियान,बेटी बचाओ,-बेटी पढ़ाओ अभियान आदि पर विषय विशेषज्ञों एवं शासकीय अधिकारियों, इलेक्ट्रानिक मीडिया,प्रिन्ट मीडिया के बीच सार्थक संवाद संपन्न हुआ। उपरोक्त कार्यशाला आयुक्त महिला सशक्तिकरण श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव के निर्देश पर जबलपुर   संभागीय आयुक्त श्री दीपक खांडेकर  के मार्गदर्शन में श्रीमती मनीषा लुम्बा के संयोजकत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में इस विषय का प्रतिपादन करते हुए समस्त केंद्रीय एवं प्रांतीय कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।

                                      कार्यक्रम में सर्वप्रथम सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री एस एस ठाकुर ने घरेलू हिंसा ,लैंगिक उत्पीड़न पर प्रकाश डाला। तदोपरान्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री हनुमन्त शर्मा ने मथुरा बाई, श्रीमती माया त्यागी, एवं श्रीमती भंवरी देवी, एवं निर्भया प्रकरणों के पर प्रकाश डालते हुए वैधानिक एवं विधि व्यवस्था में हुए परिवर्तनों एवं उसके असर पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके प्रभावशली भाषण में समकालीन सामाजिक परिस्थितियों में मीडिया एवं अन्य समस्त स्तंभो की भूमिका विशेष रुप से उल्लेखित की गई।
                                      डा. मुरली अग्रवाल,चिकित्सक,विक्टोरिया चिकित्सालय  ने पीसी पीएनडीटी अधिनियम पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के शुभारंभ में वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार,पत्रकार  श्री मोहन शशी के काव्यपाठ से हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन श्री गिरीश बिल्लौरे ,सहायक संचालक बाल भवन  द्वारा किया गया । आभार प्रदर्शन श्रीमती अजय जैन ,सहायक संचालक ने किया । कार्यक्रम में विशेष सहयोग बाल विकास परियोजना अधिकारी श्री दीपेन्द्र बिसेन एवं श्री अखिलेश मिश्रा सहायक संचालक ।

                                      कार्यक्रम आयोजन की सफलता में श्री शरद बोरकर, श्री राकेश राव,श्री पियूष खरे,श्री इन्द्र पांडे, श्री देवेन्द्र यादव,श्री टेकराम डेहरिया, श्री रामाधार बरमैया,श्री मुकेश विश्वकर्मा एवं अमित का सहयोग उल्लेखनीय रहा ।


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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!