भाई तो खून का नाता है सिरफ़ दोस्त वरदान ज़िंदगी के लिए.. !

     दोस्ती के नए फार्मूले में भले ही यह कहा हो कि हर एक दोस्त क मीना होता है। परंतु मित्रता एक सदाबहार पर्व है। मैत्री भाव सबसे अलग ऐसा अनोखा भाव है जो सबकी आंतरिक चेतना में पाया जाता है। परंतु यह वो दौर नहीं है ।
भारतीय इतिहास में मैत्री भाव का सबसे बड़ा उदाहरण कृष्ण और सुदामा मैत्री था। तो भामाशाह और महाराणा प्रताप की मैत्री भाव को कैसे भूला जा सकता है। आपको याद होगा और अगर ना भी हो तो विश्वास कीजिए यही मैत्री भाव राजा दाहिर ने परिभाषित किया था। इस्लाम के अभ्युदय के समय हिंदू राजा दाहिर का बलिदान इस्लाम के प्रवर्तक के प्रति मैत्री भाव का सर्वोच्च उदाहरण है। कवि चंद्रवरदाई और पृथ्वीराज चौहान की अटूट मैत्री विश्व जानता है। यह अलग बात है कि राजा दाहिर के त्याग के बावजूद भारतीय मैत्री भाव का मूल्यांकन आयातित विचारधारा नहीं कर सकी है। भगत सिंह राजगुरु सुखदेव के आत्मउत्सर्ग के आधार पर हुए मैत्री भाव ने देश के सम्मान के लिए क्या कुछ नहीं किया। मैत्री भाव में आयु ज्ञान ओहदा पद प्रतिष्ठा सब कुछ द्वितीयक हो जाती है। मैत्री भाव राजनीति और रक्त संबंध से परे है। मित्रों मैत्री भाव लिंग भेद नस्लभेद जातिभेद से परे होता है। जो मित्र इन सभी सीमाओं को किनारे रखकर मित्रता करते हैं उन सभी मित्रों को मित्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं बधाई वंदे मातरम

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!