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जबलपुर में तक सौ से अधिक ब्लॉगर तैयार कराने की लिए डूबेजी आए उनके साथ थे बुन्देली कवि जिनका उर्दू पर भी अधिकार है "राज़ सागरी जी " जिनका ब्लॉग तैयार करते मुझे आनंद आ रहा था कि भाई दुबे जी कितने प्रतिबद्ध हैं .... ब्लागिंग को बढावा देने .....!! इधर हम व्यस्त थे राज़ सागरी जी का ब्लॉग बुन्देली-राज़ बनाने उधर मेरी बेटी श्रद्धा दूबेजी से कहती सुनी गई :-"अंकल आप डूबे जी बनाना कभी मत छोड़ना !"बिटिया की दुआ थी या ईश्वर का संदेश हमको नहीं मालूम इतना तय है की डूबे जी की कला उनको शीर्ष पर ले जाएगी ।
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स्थानीय दैनिक समाचार पत्र नई दुनियाँ के कार्टूनिष्ट श्री डूबे जी उर्फ़ श्री राजेश दुबे जी के स्नेहीयों की कमी नहीं है । मेरे घर जितने भी समाचार पत्र आते हैं उनमें सबसे ज़्यादा इधर-उधर खोने वाला वो अखबार होता है जिसमें डूबे जी होते हैं।इस अखबार के उस पन्ने को लेकर अक्सर मेरा भतीजा गुरु और श्रद्धा के बीच झगडा भी हो जाता है । उपर डूबे जी की भेंट पर बिटिया की टिप्पणी वाह !वाह...!!
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नए ब्लॉगर श्री राज़ सगरी के प्रति आभार की वे हमारी बिरादरी में शामिल हुए । कल देर रात एक नई ब्लॉगर का पदार्पण हो ही जाएगा ब्लॉग जगत में समीर भाई के जबलपुर में होने का अर्थ अब मुझे ..... शायद सभी को समझ में आ ही रहा है...........?