Ad

पोस्ट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पोस्ट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

12 जून 2010

इश्क प्रीत लव पर अब तक

इश्क प्रीत लव पर अब तक प्रस्तुत ब्लाग्स सादर प्रस्तुत हैं आप भी पुरानी पोस्ट के लिंक दे सकते हैं ब्लॉगवाणी की सहायता से
  1. आप को इश्क़ है तो 
  2. मन प्याली, मदिरा थी प्रीत ..! ह्रदय की सुराही तौ पर न रीती 
  3. तेरी पूजा के तरीके से बेख़बर हूं मैं न ही उपवास मुझसे हो पाया ! 
  4. हम तो तंतु कसे कसे से ठोकर से सरगम ही देंगे
  5. जन्म दिन मुबारक हो मन्ना डे साहब 
  6. आज़ सुनिये ये गीत 
  7. पाबला जी पगडी में क्या है सुनिये शरद कोकास से 
  8. आवाज़ पे सुनिये एक गीत जो यादों को सहला गया 
  9. राज कपूर की फ़िल्मों के गीत 
  10. मेरा पसंदीदा गीत आप भी सुनिये 
  11. स्निग्धा तु मेरी सासों में घोल रहीं थी अमिय 
  12. सानिया कहा था न कल्लू पहलवान हुंकार भरेंगें 
  13. महफ़ूज़ अली की कविता वाली टी   शर्ट पहनेंगे अमेरिकन 
  14. सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है संजय पर बात 
  15. गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ? 
  16. गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ? 
  17. इश्क प्रीत love 
  18. रे इश्क की तासीर यही है 
  19. podcast 
  20. शहरोज़ जी को पहली बार रंगा था उनकी प्रेमिका ने:पाडकास्ट इंटरव्यू 
  21. अदा जी की आवाज़ में सुनिए तेरी आँखों के सिवा 
  22. तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ !! 
  23. दिलों को जीतने का शौक :जीतने का हुनर भी 
  24. प्रीत का यह रूप 
  25. झूठ है आज का ग्रहण सबसे लंबा ग्रहण नहीं था 
  26. अणु-अणु सँवर-सँवर तिल-तिल मिट-मिट पूरा करार करतीं हूँ 
  27. प्रिया तुम्हारी पैजन छम-छम 
  28. मिर्ज़ा ग़ालिब 
  29. प्रिय बिन बैरन-सी लगे पायल की झंकार 
  30. वेब दुनिया पर इश्क प्रीत love की चर्चा
  31. तापसी-उर्मिला 
  32. तुम्हारी सादगी ही उनके 
  33. तुम यौवन की राजकुमारी में पीड़ा शहजादा हूँ 
  34. हम ठहरे पलटवारी 
  35. आँगन के कचनार 
  36. , प्रेम,गीत- प्रेमकविता,
  37. मन अनुरागी जोगी तेरा हम-तुम में कैसी ये अनबन
  38. इनको आज सुनना ज़रूरी है...!! 
  39. प्रेम पत्र के साथ गुज़ारा कब तक करूँ कहो तुम प्रियतम
  40.  प्यार की ख़ूबसूरत रिवायतों से रूबरू कराते ये गीत 
  41. मेलोडी ऑफ़ लव 
  42. गीत सुनिए जानिये हाले दिल 
  43. आज तुमसे न मिल पाना तुम्हारे होने को परिभाषित कर गया 
  44. बस यही है प्रेम तपस्या तापसी 
  45. तनेज़ा जी क्या करूं इस नोटिस का ?
  46. आज इस गीत से काम चलेगा.? 
  47. सन्मुख प्रतिबंधों के कब तलक झुकूं कहो 
  48. प्रीत निमंत्रण ..!
  49. आभार हिंदयुग्म 
  50. भेज दो लिख कर ही प्रेम संदेश 
  51. चर्चा का नया रंग 
  52. प्रेम दीप जो तुमने बारे 
  53. आर्ची 
  54. ध्वनि-हीन संवाद 
  55. Tribute to Talat Mehmood Sahab 
  56. मेरी प्रेमिका के कारण 
  57. मागों तो दिल और जाँ सब कुछ तुमको दे दूंगीं 
  58. वंदे मातरम 
  59. बारिश को तरसते हम सुनें ये प्रेम गीत 
  60. जाग विरहनी प्रियतम आए 
  61. " स्मरणीय काव्य संध्या" 
  62. विकास परिहार नहीं रहे ! 
  63. लगातार सब ठोकर दे कर वो हँसे जा रहा है 
  64. लगातार सब ठोकर दे कर वो हँसे जा रहा है 
  65. एक ख़त : पहले प्यार को 
  66. इश्क का देवता शुक्र और आज शुक्रवार है जी 
  67. आई ए एस होने का अर्थ ? 
  68. तुम बिन सच कितना खाली सा मेरे मन का जोगी दर्पण 
  69. संजू बाबा का जन्म दिन है भाई आज 
  70. इनको खोज लाइए इनाम में पाइए..? सॉरी इनाम की घोषणा बाद में 
  71. लव कैलकुलेटर के सनसनीखेज परिणाम ज़रूर देखिये जी 
  72. इस कविता का कोई भी उपयोग करे कोई आपत्ति नहीं 
  73. पंडित ईश्वरी प्रसाद तिवारी : 
  74. यह पोस्ट उन लोगों के लिए समर्पित है जो दफ्तर के खर्च पर ब्लागिंग का मुहिम चला रहें हैं 
  75. कुत्ते भौंकते क्यों हैं.........? 
  76. मुझे शुभकामनाएं -चाहिए 
  77. आप को क्लासिफाइड की मुफ्त सुविधा मिले तो 
  78. शिर्डी-साई की भक्ति से सराबोर बावरे-फकीरा एलबम ऐसे प्राप्त कीजिए 
  79. ख़त सुधि ब्लागर्स के नाम 
  80. समय दिन और पल 
  81. मुन्नी अब मुस्कुरायेगी
  82. सियासी मित्रो जान लो :: शब्दों के साथ ज़हर उगलना तालिबानी कल्चर है 
  83. बावरे फकीरा लांचिंग फोटो एलबम 
  84. बवाल:तेरा तुझको अर्पण / 
  85. दोस्त हम तो ज़मीं को सलाम करतें है..!! 
  86. बवाल का कमाल : न हंगामा न बवाल ....!! 
  87. हर कण की "क्षण-स्मृति" : हर क्षण की कण स्मृति  
  88. वैलेंटाईन या विलेनटाइम या की वेल-इन-टाइम 

    23 मई 2010

    ज़टिल और कुंठित पोस्ट से ब्लाग अरुचिकर हो जाते हैं

                                                                    ब्लाग को पढ़ने लायक बनाना एक अहम सवाल है ज़रूरी है कि ब्लाग-पोस्ट लिखने के पहले विषय का चुनाव सही, समयानुकूल, सार्थक हो ..... ब्लाग लेखकों के अलावा  कम लोग ही पोस्ट पढ़ने को आतें हैं. आते ही अगर वे किसी विषय में प्रवेश करतें हैं तो उनको उसके [पोस्ट के ] सूत्र जुटाने की ज़हमत उठानी होती है. यानी मानसिक-तनाव का एक और कारण जब उनको ब्लाग पठन में मिले तो शायद ही वे ब्लाग्स के स्थाई पाठक हो सकते हैं. हिन्दी ब्लागिंग का असल रूप यही है . प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं ब्लाग पाठकों की तभी तो पाठक जुटा नही पाते ये ब्लागस. यानी वही पाठकों का टोटा ....! आज के हिन्दी ब्लागर्स केवल लेखन के इस साधन का उपयोग आत्मप्रदर्शन के लिये सहज सुलभ साधन की तरह कर रहे हैं. मैं पुन: उसी सवाल के ज़वाब की तलाश में हूं जो कन्टैंट की ओर इशारा करता है. हर ब्लागर को ब्लागिंग में समय ज़ाया करने के पहले सोचना है कि उसके अपने विचारों  से समाज को क्या क्या मिलेगा. हाल ही में हमारे बीच एक युवा पत्रकार का जीवन बचाने का आह्वान एक पोस्ट में हुआ. तहकीकात हुई बात सही थी सो सम्वेदनाएं पहुंच गईं सहयोग के आकार में  अक्षय कात्यानी तक . अब अक्षय के जीवन की प्रत्याशा साठ प्रतिशत से अधिक है. यानी विषय जो ज़रूरी हैं उन तक पहुंचना उसे सामने लाना बहुत ज़रूरी है. . अनावश्यक जटिल और कुंठित विषय फ़ौरी तौर पर ज़रूर आपको सुखी कर सकतें हैं किन्तु बाहरी पाठक जो वाकई पाठक होते हैं जुटाने में असफ़ल ही रहतें है.
    हम  क्या लिखना पसन्द करतें हैं.....?
    हिन्दी ब्लागर्स इस पक्ष को देख पाते हैं मुझे कदाचित इस बात का ज्ञान नहीं किन्तु यह अवश्य जानता हूं कि बहुधा ब्लागर्स सनसनीखेज़,उन्मादी,विषयों को प्राथमिकता देतें हैं. किन्तु जब सर्च में{हिन्दी में नेट पर उपलब्ध }किसी विषय विशेष के मैटर की तलाश के लिये प्रयास करना चाहें तो अंग्रेज़ी के सापेक्ष्य बेहद अकिंचन स्थिति है. इसे आप सहज ही आज़मा सकतें हैं.
    हमें  क्या लिखना  हैं.....? 
    हमें क्या लिखना है अक्सर यही भूल हो जाती है.......हमसे हमारा विषय चयन अक्सर अजीब होता है. सामाजिक मुद्दों की श्रेणी में रखे जाने वाले ब्लाग बहुधा उस श्रेणी से इतर नज़र आते हैं. तो कहीं मौलिक लेखन की धज्जियां उड़तीं नज़र आतीं हैं.
    क्रमश: जारी

    27 मई 2009

    प्रतिचिन्तन .

    संवेदना संसार:
    आलेख में आपने कर्म काण्ड को अनुपयुक्त बताया आज के सन्दर्भ में मानी है किन्तु तत्कालीन परिस्थितियों में कार्यानुसार अर्थ व्यवस्था का आधार रहे हैं ये कर्म काण्ड . इसे जानने-समझाने के लिए बतादूँ कि आप किसी भी क्रिया को देखिए आपको तस्वीर का यह भाग भी दिखेगा. जन्म के समय से मृत्यु तक के संस्कार को कर्मकांड से जोड़ कर एक व्यवस्था को जन्मा भारतीय समाज ने. मृत्यु के 40 दिन तक शोक काल सभी धर्मों में मान्य है 13 दिवस अति महत्व पूर्ण होते हैं , चूंकि समाज का अधिसंख्यक भाग ग्रामीण था सो तदनुसार नियम बने . अब आप शवदाह करने वाले का शमशान घाट में स्नान करना परिवार का सादा रहना सर मुड़वाना आपकी नज़र में गलत हो सकता है किन्तु सच तो यह है कि कर्मकांड के इस उदाहरण में साफ़ तौर पर मृत्यु उपरांत शोक को महत्व दिया है जो मानवीयता से सम्बन्धित तथ्य है.
    कभी लगता है भारतीय सामाजिक व्यवस्था में कर्म काण्ड तत्कालीन व्यवस्था के लिए परिहार्य थे .
    वर्तमान में भले ही समयातीत हो चुके हैं . मुझे भी कर्मकांड से अरुचि सी है क्योंकि एक पंडित इसे
    जिस तरह से प्रस्तुत करता है वो गलत है . इसके सटीक उदाहरण हैं प्रयाग राज के पंडे जो गिरोह बंद होकर
    भावुक मन को धर्म के नाम पर ब्लेक-मेल करते हुए क्षतिग्रस्त करतें पावन व्यवस्थाओं को . इसका अर्थ ये कदापि नहीं
    की मूल रूप से कर्मकान्ड सदैव गलत है.
    ऐसा भी ठीक नहीं हैं कि हम और आप को तत्कालीन कर्मकांडों को यथा रूप स्वीकार ही करना चाहिए . किन्तु कर्मकांड को किस स्वरुप में स्वीकार्यना आप को तय करना है. वास्तव में वैकल्पिक व्यवस्थाओं का मार्ग सदैव कर्म काण्ड में खुला है . यहाँ मैं जयंत चौधरी की टिप्पणी से सहमत हूँ वे कहते हैं :संगीता जी,-सच है...जैसे मेरे पिता जी कहते हैं... हम लोग उन कर्म कांडों के पीछे के अर्थ और कारण से अनजान हैं.
    इसका बहुत बड़ा कारण मुसलमान शासकों के द्वारा किया दमन (पंडितों और धार्मिक किताबों का) भी है.
    तो कुछ पंडितों के अज्ञान और ज्ञान ना बाटने का भी है..
    किन्तु इसका यह अर्थ नहीं की सब बकवास हैं और हमें उन्हें त्याग देना चाहिए!!!
    बहुत विचारणीय लेख.
    बधाई..
    इस आलेख में सब कुछ सार्थक और सटीक लिखा
    मैं भी सहमत हूँ शेष आलेख पूर्णतया सहमत हूँ

    19 फ़र॰ 2009

    डूबे जी की भेंट





    ***************************************************************************************
    जबलपुर में तक सौ से अधिक ब्लॉगर तैयार कराने की लिए डूबेजी आए उनके साथ थे बुन्देली कवि जिनका उर्दू पर भी अधिकार है "राज़ सागरी जी " जिनका ब्लॉग तैयार करते मुझे आनंद आ रहा था कि भाई दुबे जी कितने प्रतिबद्ध हैं .... ब्लागिंग को बढावा देने .....!! इधर हम व्यस्त थे राज़ सागरी जी का ब्लॉग बुन्देली-राज़ बनाने उधर मेरी बेटी श्रद्धा दूबेजी से कहती सुनी गई :-"अंकल आप डूबे जी बनाना कभी मत छोड़ना !"बिटिया की दुआ थी या ईश्वर का संदेश हमको नहीं मालूम इतना तय है की डूबे जी की कला उनको शीर्ष पर ले जाएगी ।
    ***************************************************************************************
    स्थानीय दैनिक समाचार पत्र नई दुनियाँ के कार्टूनिष्ट श्री डूबे जी उर्फ़ श्री राजेश दुबे जी के स्नेहीयों की कमी नहीं है । मेरे घर जितने भी समाचार पत्र आते हैं उनमें सबसे ज़्यादा इधर-उधर खोने वाला वो अखबार होता है जिसमें डूबे जी होते हैं।इस अखबार के उस पन्ने को लेकर अक्सर मेरा भतीजा गुरु और श्रद्धा के बीच झगडा भी हो जाता है । उपर डूबे जी की भेंट पर बिटिया की टिप्पणी वाह !वाह...!!
    ***************************************************************************************
    नए ब्लॉगर श्री राज़ सगरी के प्रति आभार की वे हमारी बिरादरी में शामिल हुए । कल देर रात एक नई ब्लॉगर का पदार्पण हो ही जाएगा ब्लॉग जगत में समीर भाई के जबलपुर में होने का अर्थ अब मुझे ..... शायद सभी को समझ में आ ही रहा है...........?

    6 जन॰ 2009

    बूझ लिया और जान लिया पहचान लिया भी

    “ब्लागर्षियों…!!”

    पहेली ...ओउर .....ओकर जबाव .. तो ठीक है हमहूँ कहे देत हैं कि
    हम तो उस भैये को खोजत हैं जिसने पहले-पहल यानि कि सबसे
    पहले मुर्गी और अंडा को मुर्गी और अंडा की संज्ञा दी है. जिसकी तर्ज़ पे "ब्रह्म की पहचान"
    करने वाले महर्षियों कि तरह "ब्लॉग-ऋषिगण " इस पहले का भेद जानने की कोशिश में
    लगे हैं...!!अब इस पहेली को
    को सुलझाने कि कोशिश के दौर में विजेता महारथियों को मेरी और मेरे अन्य ब्लॉग-मुनियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं
    पहुंचे जी !

    कितना असरदार

    Free Page Rank Tool

    यह ब्लॉग खोजें