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29 अक्टू॰ 2009

समय तुम्हारा सुधरना ज़रूरी है


समय तुम
मेरे भाग्य-चक्र को
घुमाते हो
शायद तुम मेरे अस्तित्व को
आजमाते हो.....?
चलूं आज तुम्हैं
रोकने
कलाई घडी
रोक देता हूं !
तुम मुझसे असहमत हो
मैं तुमसे
क्यों न हम
एक बार फ़िर अज़नवी बन जाएं
*****************
समय
सांसों के काफ़िले को
अपनी आज़ादी मिली है
धडकनों की अपनी राह है
फ़िर तुम्हारा हस्तक्षेप हर ओर..?
समय तुम्हारा सुधरना ज़रूरी है
भले हस्तक्षेप तुम्हारी आदत है
या फ़िर मज़बूरी है.....!
*****************
ओ समय, तुम जो भी हो
स्वतन्त्रता के भंजक नहीं हो सकते
तुमको समाज़ में रहना है
सादगी से रहो
संजीदगी से रहो
सहजता से रहो
सबके रहो
*****************
मैं जानता हूं
तुम समझदार नहीं हो
कभी कभार असरदार भी नहीं होते
तब मेरे प्रहार से बचना
मुझे तुम्हैं सुधारना आता है
मैं तुम्हारा और भाग्य का गुलाम नहीं

1 अग॰ 2008

दोस्ती के इस सप्ताह को समर्पित

इस ब्लॉग को संगीत मय बनाने में मदद मिली "स्वर सृजन (SWAR SRIJAN) "की मैं आभारी हूँ डा. मेराज अहमद. अलीगढ, उत्तरप्रदेश का और मीत का
हजूर ये हफ्ता दोस्ती के नाम करने के पहले आप अपनी पारखी नज़र को तीखी करालीजिये
वर्ना आप कल कल्लू पान वाले की दूकान ,कहवा घर में या बाथ रूम में ये गुनगुनाते पाएगे ख़ुद को =>हम को किसके ग़म ने मारा, यह कहानी फ़िर सही ,
हाल फिल हाल एक बात कह दूँ
चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी अवारगी ने मुझको आवारा बना डाला ॥
आज एक पोलिटिकल प्रेस कांफ्रेंस देख कर मुझे लगा कि लोगों को अब चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है या कई तो जस्विंदर सिंह के सुर में सुर मिला के नही है रास्ता नहीं है । अभी वो कुछ दोस्त बज़्म में नहीं हैं जो कभी ये गुनगुनाया करते थे ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती थी उन्हें । किस से कहें ? ये अपनी पीडा
तो ठीक है आप किसी भी नीली इबारत पर चटका लगा के गीत/ग़ज़ल सुन लीजिए
दोस्त और दोस्ती पे मर्सिया पड़ने वाले दोस्तों के लिए मुझे दोस्त और दोस्ती की समझ है जो कुछ यूँ समझिए
=>दोस्ताना,याराना,मित्रता सब कुछ चाहे पवित्रता ....वर्ना :
अपने मक़सद के सैकड़ों सलाम होते हैं
काम के आदमी से सबको काम होते हैं ।

हाथों का मिलना ,दोस्ती का संकेत तो है खूँ की रफ़्तार हाथों से समझ लेता हूँ
किसे कितना वज़न देना है मुझको
नाप रफ़्तार ऐ खूँ ,दिल को बता देता हूँ

कितना असरदार

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