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23 मार्च 2008

आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां "



आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां "
भावों की सलाई लेकर हम शब्द बुने तुम सुर देना
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जीवन के सफर में मैंने भी
कुछ सपन बुनें तुमको लेकर .
कुछ स्वपन मेरे थे मुक्त गीत
कुछ सपनों के तीखे तेवर ..?
मन की पीडा जब गीत बने श्रेयस होगा तुम सुर देना ...!!
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आभास मुझे था जीवन में
कुछ ऐसा हम कर जाएंगे
देंगें इक मुट्ठी दान कभी
भर-भर के झोली पाएँगें ..!
जब मन इतराए बादल सा तुम सावन का रिम झिम सुर देना !!
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" आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां "
गिरीश चचा,सतीश हरीश,अंकुर,सोनू,श्रद्धा, चिन्मय,आस्था,अनुभा,शिवानी,
एवं काशीनाथ बिल्लोरे एवं समस्त बिल्लोरे परिवार जबलपुर,
के साथ बावरे फकीरा टीम,सुदर्शन परिवार,मनीष शर्मा,माधव सिंह यादव,

26 दिस॰ 2007

कहानी कहते-कहते सो गयी माँ .....?

सव्य साची माँ प्रमिला देवी बिल्लोरे स्मृति दिवस २८/१२/२००७





समय का पहिया कब कैसे घूम जाता है कौन जाने....माँ सव्यसाची भाव की पुनर्स्थापना के लिए जन्मी होशंगाबाद जिले के सिवनी -मालवा में । पिता पन्नालाल दीवान [चौरे]एवं चन्द्र भागा देवी के घर , देवल मोहल्ला शुक्ला गली , आभास-श्रेयस की दादी के एन सामने वाला घर जहाँ उनकी किलकारियाँ गूँज रहीं होगीं , वही सिवनी मालवा तब बानापुरा के नाम से भी जाना जाता है। वही कस्बा जहाँ के शर्मा गुरूजी के पढाए विद्यार्थी उनकी कसौटी पे कसे जाते इतने कि यदि अब के शिक्षा कर्मी तब गुरूजी नहीं होते एक प्रतिशत भी करें तो पिट जाएंगे बेचारे .... जी हाँ माँ १९३७ की पोला अमावश्या को जन्मीं थीं । माँ के साथ अभाव और ईमानदारी स्नेह एक साथ उनके मानस में पल-पुस रहे थे। संघर्ष यहीं से सीख रहीं थी माँ अपने भाई भतीजों के साथ ।
..........निरंतर

कितना असरदार

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