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6 मार्च 2011

होली गीत: स्व. शांति देवी वर्मा

होली गीत: 

स्व. शांति देवी वर्मा 

होली खेलें सिया की सखियाँ                                                                                                     


होली खेलें सिया की सखियाँ,
                       जनकपुर में छायो उल्लास....
रजत कलश में रंग घुले हैं, मलें अबीर सहास.
           होली खेलें सिया की सखियाँ...
रंगें चीर रघुनाथ लला का, करें हास-परिहास.
            होली खेलें सिया की सखियाँ...
एक कहे: 'पकडो, मुंह रंग दो, निकरे जी की हुलास.'
           होली खेलें सिया की सखियाँ...
दूजी कहे: 'कोऊ रंग चढ़े ना, श्याम रंग है खास.'
          होली खेलें सिया की सखियाँ...
सिया कहें: ' रंग अटल प्रीत का, कोऊ न अइयो पास.'
                  होली खेलें सिया की सखियाँ...
 गौर सियाजी, श्यामल हैं प्रभु, कमल-भ्रमर आभास.
                   होली खेलें सिया की सखियाँ...
'शान्ति' निरख छवि, बलि-बलि जाए, अमिट दरस की प्यास.
                      होली खेलें सिया की सखियाँ...
***********




               होली खेलें चारों भाई                                                                                  
होली खेलें चारों भाई, अवधपुरी के महलों में...
अंगना में कई हौज बनवाये, भांति-भांति के रंग घुलाये.                                                
पिचकारी भर धूम मचाएं, अवधपुरी के महलों में...
राम-लखन पिचकारी चलायें, भरत-शत्रुघ्न अबीर लगायें.
लख दशरथ होएं निहाल, अवधपुरी के महलों में...
सिया-श्रुतकीर्ति रंग में नहाई, उर्मिला-मांडवी चीन्ही न जाई.
हुए लाल-गुलाबी बाल, अवधपुरी के महलों में...
कौशल्या कैकेई सुमित्रा, तीनों माता लेंय बलेंयाँ.
पुरजन गायें मंगल फाग, अवधपुरी के महलों में...
मंत्री सुमंत्र भेंटते होली, नृप दशरथ से करें ठिठोली.
बूढे भी लगते जवान, अवधपुरी के महलों में...
दास लाये गुझिया-ठंडाई, हिल-मिल सबने मौज मनाई.
ढोल बजे फागें भी गाईं,अवधपुरी के महलों में...
दस दिश में सुख-आनंद छाया, हर मन फागुन में बौराया.
'शान्ति' संग त्यौहार मनाया, अवधपुरी के महलों में...
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24 अक्टू॰ 2010

दोहा सलिला: भाई को भाई की, भाये कुछ बात..... संजीव 'सलिल'

दोहा सलिला:

भाई को भाई की, भाये कुछ बात.....

संजीव 'सलिल'
*
जो गिरीश मस्तक धरे, वही चन्द्र को मौन.
अमिय-गरल सम भाव से, करे ग्रहण है कौन?
महाकाल के उपासक, हम न बदलते काल.
व्याल-जाल को छिन्न कर, चलते अपनी चाल..
अनुज न मेरा कभी भी, होगा तनिक हताश.
अरिदल को फेंटे बना, निज हाथों का ताश..
मेघ न रवि को कभी भी, ढाँक सके हैं मीत.
अस्त-व्यस्त खुद हो गए, गरज-बरस हो भीत..
सलिल धार को कब कहें, रोक सकी चट्टान?
रेत बनी, बिखरी, बही, रौंद रहा इंसान..
बाधाएँ पग चूम कर, हो जायेंगी दूर.
मित्रों की पहचान का, अवसर है भरपूर..
माँ सरस्वती शक्ति-श्री का अपूर्व भण्डार.
सदा शांत रह, सृजन ही उनका है आचार..
कायर उन्हें  न मानिये, कर सकती हैं नाश.
काट नहीं उनकी कहीं, डरे काल का पाश..
शब्द-साधना पथिक हम, रहें हमेशा शांत.
निबल न हमको समझ ले, कोई होकर भ्रांत..
सृजन साध्य जिसको 'सलिल', नाश न उसकी चाह.
विवश करे यदि समय तो, सहज चले उस राह..
चन्द्र-चन्द्रिका का नहीं, कुछ कर सका कलंक.
शरत-निशा कहती यही, सत्य सदा अकलंक..
वर्षा-जल की मलिनता, से न नर्मदा भीत.
अमल-विमल-निर्मल बाहें, नमन करे जग मीत..
यह साँसों की धार है, आसों का सिंगार.
कीर्ति-कथा ही अंत में, शेष रहे अविकार..
जितने कंटक-कष्ट में, खिलता जीवन-फूल.
गौरव हो उतना अधिक, कोई न सकता भूल..
हम भी झेलें विपद को, धरे अधर-मुस्कान.
तिमिर-निशा को दिवाली, करते चतुर सुजान..
************************************

30 सित॰ 2010

हास्य कविता: कान बनाम नाक संजीव 'सलिल'

हास्य कविता:

कान बनाम नाक

संजीव 'सलिल'
*
शिक्षक खींचे छात्र के साधिकार क्यों कान?
कहा नाक ने- 'मानते क्यों अछूत श्रीमान?
क्यों अछूत श्रीमान, न क्यों कर मुझे खींचते?
क्यों कानों को लाड़-क्रोध से आप मींचते??

शिक्षक बोला- "छात्र की अगर खींच दूँ नाक,
कौन करेगा साफ़ यदि बह आयेगी नाक?
बह आयेगी नाक, नाक पर मक्खी बैठे.
ऊँची नाक हुई नीची, तो हुए फजीते..

नाक एक है कान दो, बहुमत का है राज.
जिसकी संख्या अधिक हो, सजे शीश पर ताज..
सजे शीश पर ताज, सभी संबंध भुनाते.
गधा बाप को और गधे को बाप बताते..

नाक कटे तो प्रतिष्ठा का हो जाता अंत.
कान खिंचे तो सहिष्णुता बढ़ती, बनता संत..
संत बने तो गुरु कहें सारे गुरुघंटाल.
नाक खिंचे तो बंद हो श्वास हाल-बेहाल..

कान ज्ञान को बाहर से भीतर पहुँचाते.
नाक दबा अन्दर की दम बाहर ले आते..
टाँग अड़ा या फँसा मत, खींचेगे सब टाँग.
टाँग खिंची, औंधे गिरा, बिगड़ेगा सब स्वांग..

खींच-खिंचाकर कान, हो गिन्नी बुक में नाम.
'सलिल' सीख कर यह कला, खोले तुरत दुकान..
खोले तुरत दुकान, लपक पेटेंट कराये.
एजेंसी दे-देकर भारी रकम कमाये..

हम भी खींचें जाएँ, दो हमको भी अधिकार.
केश निकालेंगे जुलुस, माँग न हो स्वीकार..
माँग न हो स्वीकार, न तब तक माँग भराएँ.
छोरा-छोरी तंग, किस तरह ब्याह रचाएँ?

साली जीजू को पकड़, खींचेगी जब बाल.
सहनशीलता सिद्ध हो, तब पायें वरमाल..
तब पायें वरमाल, न झोंटा पकड़ युद्ध हो.
बने स्नेह सम्बन्ध, संगिनी शुभ-प्रबुद्ध हो..

विश्वयुद्ध हो गृह में, बाहर खबर न जाए.
कान-केश को खींच, पराक्रम सुमुखि दिखाए..
आँख, गाल ना अधर खिंचाई सुख पा सकते.
कान खिंचाते जो लालू सम हरदम हँसते..

**********************************

1 सित॰ 2010

बाल गीत: लंगडी खेलें..... आचार्य संजीव 'सलिल'

*
बाल गीत:

लंगडी खेलें.....

आचार्य संजीव 'सलिल'
*
आओ! हम मिल
लंगडी खेलें.....
*
एक पैर लें
जमा जमीं पर।
रखें दूसरा
थोडा ऊपर।
बना संतुलन
निज शरीर का-
आउट कर दें
तुमको छूकर।
एक दिशा में
तुम्हें धकेलें।
आओ! हम मिल
लंगडी खेलें.....
*
आगे जो भी
दौड़ लगाये।
कोशिश यही
हाथ वह आये।
बचकर दूर न
जाने पाए-
चाहे कितना
भी भरमाये।
हम भी चुप रह
करें झमेले।
आओ! हम मिल
लंगडी खेलें.....*
हा-हा-हैया,
ता-ता-थैया।
छू राधा को
किशन कन्हैया।
गिरें धूल में,
रो-उठ-हँसकर,
भूलें- झींकेगी
फिर मैया।
हर पल 'सलिल'
ख़ुशी के मेले।
आओ! हम मिल
लंगडी खेलें.....
*************

20 जुल॰ 2010

हास्य कुण्डली: संजीव 'सलिल'



















हास्य कुण्डली:
 संजीव 'सलिल'
*
घरवाली को छोड़कर, रहे पड़ोसन ताक.
सौ चूहे खाकर बने बिल्ली जैसे पाक..
बिल्ली जैसे पाक, मगर नापाक इरादे.
काश इन्हें इनकी कोई औकात बतादे..
भटक रहे बाज़ार में, खुद अपना घर छोड़कर.
रहें न घर ना घाट के, घरवाली को छोड़कर..
*
सूट-बूट सज्जित हुए, समझें खुद को लाट.
अंगरेजी बोलें गलत, दिखा रहे हैं ठाठ..
दिखा रहे हैं ठाठ, मगर मन तो गुलाम है.
निज भाषा को भूल, नामवर भी अनाम है..
हुए जड़ों से दूर, पग-पग पर लज्जित हुए.
घोडा दिखने को गधे, सूट-बूट सज्जित हुए..
*
गाँव छोड़ आये शहर, जबसे लल्लूलाल.
अपनी भाषा छोड़ दी, तन्नक नहीं मलाल..
तन्नक नहीं मलाल, समझते खुद को साहब.
हँसे सभी जब सुना: 'पेट में हैडेक है अब'..
'फ्रीडमता' की चाह में, भटकें तजकर ठाँव.
होटल में बर्तन घिसें, भूले खेती-गाँव..
*
दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

27 मार्च 2010

जबलपुर के बारे में पूछ कर बहुत हत प्रभ किया पाबला जी ने

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 ज्ञानरंजन 
भिलाई से ब्लॉग-जगत में  मशहूर ब्लॉगर मित्र श्री बी एस  पाबला जी ने आज मुझे तब हतप्रभ कर दिया जब उन्हौने जबलपुर शहर के बारे में चर्चा की. सामान्य रूप से जबलपुर यानी jabalpur या पुराने लोग jabblpore के नाम से जानते. हैं   साहित्यकार मोहन शशि आमादा हैं इस  संस्कारधानी-जबलपुर  को जाबाली-ऋषि की तपोभूमि होने की वज़ह से जिद पर अड़े हैं कि इस शहर का नाम जाबालिपुरम हो. ये अलग बात है कि बम्बई मुंबई ज़ल्द हो गया किन्तु जबलपुर के 'जाबालिपुरम' होने के कोई आसार दूर तक नहीं दिखाई देते.  हालाकि विकीपीडिया हिन्दी ने जबलपुर से   परिचित कराया है किन्तु हिन्दी की मुझ जैसे लोगों ने जो नेट पर हिन्दी के कंटेंट को बढावा देना चाहते हैं ने अभी तक गंभीरता से इस दिशा में काम नहीं किया. इंग्लिश वाले भी कोई कमाल नहीं कर रहे हैं देखिये विकीपीडिया [अँग्रेजी] में भी सूचनाएं कम ही हैं  jabalpur या  jabbalpore.के बारे में फिर भी हिन्दी संस्करण के सापेक्ष विक्की के अँग्रेजी संस्करण में अधिक सूचनाएं हैं. 

जबलपुर के बारे में विकी  हिन्दी में उपलब्ध जानकारी का उदाहरण देखिये नर्मदा के तट के घाटों का विवरण विहीन उल्लेख देखिये घाट के रूप में  :भेड़ाघाट,तिलवारा घाट,जिलहरी घाट,ग्वारी घाट का बिना किसी बाहरी लिंक के केवल नाम उल्लेखित किये गए हैं जबकि अँग्रेजी में एक सिलसिलेवार जानकारी अंकित है. और इसी नेट-खंगाली की वज़ह से मैं ये जान पाया कि अर्जुन-रामपाल 
 भी जबलपुर में Date of Birth (Birthday):  26 November, 1972 - जन्मे हैं पाबला जी का कहना है कि:'अपने शहर के बारे में अधिकाधिक सूचना हिन्दी भाषा में डाली जा सकें तो बेहतर होगा, हिन्दी का प्रयोग कर अधिकाँश विद्द्यार्थी / पर्यटक/विशेषज्ञ आदि क्यों करना चाहेंगे जब कि उनको अपेक्षित सामग्री उपलब्ध न हो. जैसे जबलपुर  के प्रसिद्द व्यक्तियों की सूची हिन्दी विकी पर देखिये

प्रसिद्ध व्यक्ति

देखिये यह अंग्रेज़ी विकी परFamous Personalities
  • Rani Durgavati Queen Of Gondvana, at mandala ,Fought with Muslim invader of Mugal Dynasty
  • Sharon Lazarus—CEA, EXL Services.
  • K.S.Sudarshan former RSS Sarsangh Chalak First batch Graduate of Electronics And Telecommunication Govt.Engg.College Jabalpur www.thehindu.com/fline/fl1706/17060330.htm
  • Pt Bhawani Prasad Tiwari (Padmashree (1972 Art & Literature)), Ex Mayor & Rajya Sabha Member), Famous Writer,Poet & Social Reformer
  • Osho (Rajneesh Chandra Mohan), Philoshopher & Spiritual Leader
  • Prem Nath, Famous Bollywood Actor
  • Chandu Sarvate, Indian Test critcket player.
  • Baburao Paranjape Former Parliamentarian.
  • Harishankar Parsai (1924–1995), Hindi writer and satirist
  • Arjun Rampal, Famous Indian Model & Bollywood Actor[21]
  • Rajindernath, Famous Bollywood Actor
  • Raghuvir Yadav, Famous Indian Television Actor of Mungerilal Ke Haseen Sapne fame
  • Ashutosh Rana, Bollywood Actor, Studied in Jabalpur
  • Aadesh Shrivastava, Bollywood Music Director, Brought up in Jabalpur
  • Deepak Sareen, Bollywood director of Aaina and Jab Pyar Kisi Se Hota Hai fame
  • Ajai Chaudhary, Co-founder HCL Technology
  • Maharishi Mahesh Yogi, Founder of Transcendental Meditation[22]
  • Kailash Iyer, friend of Sayee ganesan spend his childhood in this historic town
  • Dr. Bhaskar Khandekar India's First Music Therapist, Classical violinist, www.indiasfirst.com *
  • Dr. Ghulam Mustafa Khan, Researcher, Author, Scholar of Urdu Literature & Linguistics, Educationists & Spiritual Leader of Pakistan [23]
  • Subhadra Kumari Chauhan, Famous Hindi poet settled in the city after her marriage [24]
  • Madhu Yadav, International women's Hokey Captain
  • Prof. H. P. Dixit, Former Vice Chancellor of IGNOU
  • Shaleen Bhanot, Famous Television Actor
  • Sharad Yadav, Famous politician, Studied in Jabalpur
  • Brajesh Mishra, Former National Security Advisor
  • Pt. Kunjilal Dubey, Padma Bhushan, Ex speaker of MP assembly
  • Jadugar Anand - President, All India Magic Federation, World Famous Magician
  • Neha Uppal - MTV Speed Diva
  • Kiron Kher - Famous Actress, Studied in Jabalpur, (St. Joseph's Convent)
  • Shourabh Modi- Famous Phillumenist,painter (Limca Book of Records Holder) 1 International, 1 national and 2 times state level gold medalist for his extremely beautiful penmanship.
  • Shiv Khare, Executive Director, Asian Forum of Parliamentarians on Population and Development (AFPPD), Bangkok, Thailand
  • Vivek Sharma Film Director of bollywood. (Bhootnath and Kal Kissne Dekha)[25]
  • Yunus Khan Announcer Radiojockey (vividh bharati)and Columnist (Dainik Bhaskar)[26]
  • Pt. Vishwa Nath Dubey - Ex mayor of Jabalpur. NECC Vice President and Owner of Phoenix Group of Industries.
  • M. Naseer Khan, Director, Elevate Institute, Famous motivational speaker
  • Gurmeet Choudhary, Famous Actor, as Lord Rama in Ramayan (2008 TV series)NDTV Imagine,partcipant of reality show "Pati,Patni Aur Woh" in NDTV Imagine, studied in Jabalpur
  • Aabhash joshi singer, voice of India,star plus
  • Dr. Prof. S.N Singh,Ex Dean of Faculty of Commerce RDVV,Ex principal G.S college,Ex Director DSPSR,DIMAT,Nominated for Rshatriya Gaurav Award for contribution in field of Education
     यदि आज पाबला जी ने जबलपुर की चर्चा न की होती तो शायद यह पोस्ट जो आत्मावलोकन है नहीं लिख पाता. अब वे पूछ रहे थे भाई वो मेडिकल-कॉलेज के पास जैन धर्मावलम्बियों का एक मंदिर है क्या कहते हैं उसे
'मैंने कहा :- पिसनहारी की मढ़िया  ' इस पर पाबला जी का प्रश्न  बोधक सुझाव था कि इसके पीछे जो कहाने है उसे आप पेश कर सकतें हैं सचित्र यही तो सार्थक ब्लागिंग है गुरु.....!
मित्रों सच एक ये काम भी है जो छोट रहा था मुझसे/हमसे अगली पोस्ट ज़रूर इसी पर आधारित होगी किन्तु कब ? सरकारी आदमीं हूँ इकतीस मार्च ख़त्म हो जाए तब . तब तक  स्वर साधिका तापसी नागराज की अपील  सुनिए

15 मार्च 2010

जबलपुर में चिट्ठा चर्चा पर दोहे: ---'सलिल'

जबलपुर में चिट्ठा चर्चा पर दोहे:

चिट्ठाकारों को 'सलिल', दे दोहा उपहार.
मना रहा- बदलाव का, हो चिट्ठा औज़ार..

नेह नरमदा से मिली, विहँस गोमती आज.
संस्कारधानी अवध, आया- हो शुभ काज..

'डूबे जी' को निकाले, जो वह करे 'बवाल'.
किस लय में 'किसलय' रहे, पूछे कौन सवाल?.

चिट्ठाकारों के मिले, दिल के संग-संग हाथ.
अंतर में अंतर न हो, सदय रहें जगनाथ..

उड़ न तश्तरी से कहा, मैंने खाकर भंग.
'उड़नतश्तरी' उड़ रही', कह- वह करती जंग..

गिरि-गिरिजा दोनों नहीं, लेकिन सुलभ 'गिरीश'.
'सलिल' धन्य सत्संग पा, हैं कृपालु जगदीश..

अपनी इतनी ही अरज, रखे कुशल-'महफूज़'.
दोस्त छुरी के सामने, 'सलिल' न हो खरबूज..

बिना पंख बरसात बिन, करता मुग्ध 'मयूर'.
गप्प नहीं यह सच्च है, चिटठाकार हुज़ूर!..

********************************

18 दिस॰ 2009

हिन्दी में हालावाद महाकवि केशव पाठक के फाउनटेन पेन से झर कर आया...?

मुक्तिबोध की ब्रह्मराक्षस का शिष्य, कथा को आज के सन्दर्भों में समझाने की कोशिश करना ज़रूरी सा होगया है । मुक्तिबोध ने अपनी कहानी में साफ़ तौर पर लिखा था की यदि कोई ज्ञान को पाने के बाद उस ज्ञान का संचयन,विस्तारण,और सद-शिष्य को नहीं सौंपता उसे मुक्ति का अधिकार नहीं मिलता । मुक्ति का अधिकारक्या है ज्ञान से इसका क्या सम्बन्ध है,मुक्ति का भय क्या ज्ञान के विकास और प्रवाह के लिए ज़रूरीहै । जी , सत्य है यदि ज्ञान को प्रवाहित न किया जाए , तो कालचिंतन के लिए और कोई आधार ही न होगा कोई काल विमर्श भी क्यों करेगा। रहा सवाल मुक्ति का तो इसे "जन्म-मृत्यु" के बीच के समय की अवधि से हट के देखें तो प्रेत वो होता है जिसने अपने जीवन के पीछे कई सवाल छोड़ दिये और वे सवाल उस व्यक्ति के नाम का पीछा कर रहेंहो । मुक्तिबोध ने यहाँ संकेत दिया कि भूत-प्रेत को मानें न मानें इस बात को ज़रूर मानें कि "आपके बाद भी आपके पीछे " ऐसे सवाल न दौडें जो आपको निर्मुक्त न होने दें !जबलपुर की माटी में केशव पाठक,और भवानी प्रसाद मिश्र में मिश्र जी को अंतर्जाल पर डालने वालों की कमीं नहीं है किंतु केशवपाठक को उल्लेखित किया गया हो मुझे सर्च में वे नहीं मिले । अंतरजाल पे ब्लॉगर्स चाहें तो थोडा वक्त निकाल कर अपने क्षेत्र के इन नामों को उनके कार्य के साथ डाल सकतें है । मैं ने तो कमोबेश ये कराने की कोशिश की है । छायावादी कविता के ध्वजवाहकों में अप्रेल २००६ को जबलपुर के ज्योतिषाचार्य लक्ष्मीप्रसाद पाठक के घर जन्में केशव पाठक ने एम ए [हिन्दी] तक की शिक्षा ग्रहण की किंतु अद्यावासायी वृत्ति ने उर्दू,फारसी,अंग्रेजी,के ज्ञाता हुए केशव पाठक सुभद्रा जी के मानस-भाई थे । केशव पाठक का उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..">उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..[०१] करना उनकी एक मात्र उपलब्धि नहीं थी कि उनको सिर्फ़ इस कारण याद किया जाए । उनको याद करने का एक कारण ये भी है-"केशव विश्व साहित्य और खासकर कविता के विशेष पाठक थे " विश्व के समकालीन कवियों की रचनाओं को पड़ना याद रखना,और फ़िर अपनी रचनाओं को उस सन्दर्भ में गोष्टीयों में पड़ना वो भी उस संदर्भों के साथ जो उनकी कविता की भाव भूमि के इर्द गिर्द की होतीं थीं ।समूचा जबलपुर साहित्य जगत केशव पाठक जी को याद तो करता है किंतु केशव की रचना धर्मिता पर कोई चर्चा गोष्ठी ..........नहीं होती गोया "ब्रह्मराक्षस के शिष्य " कथा का सामूहिक पठन करना ज़रूरी है। यूँ तो संस्कारधानी में साहित्यिक घटनाओं का घटना ख़त्म सा हो गया है । यदि होता भी है तो उसे मैं क्या नाम दूँ सोच नहीं पा रहा हूँ । इस बात को विराम देना ज़रूरी है क्योंकि आप चाह रहे होंगे [शायद..?] केशव जी की कविताई से परिचित होना सो कल रविवार के हिसाबं से इस पोस्ट को उनकी कविता और रुबाइयों के अनुवाद से सजा देता हूँ सहज स्वर-संगम,ह्रदय के बोल मानो घुल रहे हैं
शब्द, जिनके अर्थ पहली बार जैसे खुल रहे हैं .
दूर रहकर पास का यह जोड़ता है कौन नाता
कौन गाता ? कौन गाता ?
दूर,हाँ,उस पार तम के गा रहा है गीत कोई ,
चेतना,सोई जगाना चाहता है मीत कोई ,
उतर कर अवरोह में विद्रोह सा उर में मचाता !
कौन गाता ? कौन गाता ?
है वही चिर सत्य जिसकी छांह सपनों में समाए
गीत की परिणिति वही,आरोह पर अवरोह आए
राम स्वयं घट घट इसी से ,मैं तुझे युग-युग चलाता ,
कौन गाता ? कौन गाता ?
जानता हूँ तू बढा था ,ज्वार का उदगार छूने
रह गया जीवन कहीं रीता,निमिष कुछ रहे सूने.
भर न क्यों पद-चाप की पद्ध्वनि उन्हें मुखरित बनाता
कौन गाता ? कौन गाता ?
हे चिरंतन,ठहर कुछ क्षण,शिथिल कर ये मर्म-बंधन ,
देख लूँ भर-भर नयन,जन,वन,सुमन,उडु मन किरन,घन,
जानता अभिसार का चिर मिलन-पथ,मुझको बुलाता .
कौन गाता ? कौन गाता ?
_________________________________________________________________________________
हिन्दी में हालावाद केशव पाठक के फाउनटेन पेन से झर कर आया।
__________________________________________________________________________________

23 मार्च 2008

आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां "



आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां "
भावों की सलाई लेकर हम शब्द बुने तुम सुर देना
***********************
जीवन के सफर में मैंने भी
कुछ सपन बुनें तुमको लेकर .
कुछ स्वपन मेरे थे मुक्त गीत
कुछ सपनों के तीखे तेवर ..?
मन की पीडा जब गीत बने श्रेयस होगा तुम सुर देना ...!!
*************************
आभास मुझे था जीवन में
कुछ ऐसा हम कर जाएंगे
देंगें इक मुट्ठी दान कभी
भर-भर के झोली पाएँगें ..!
जब मन इतराए बादल सा तुम सावन का रिम झिम सुर देना !!
**************************
" आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां "
गिरीश चचा,सतीश हरीश,अंकुर,सोनू,श्रद्धा, चिन्मय,आस्था,अनुभा,शिवानी,
एवं काशीनाथ बिल्लोरे एवं समस्त बिल्लोरे परिवार जबलपुर,
के साथ बावरे फकीरा टीम,सुदर्शन परिवार,मनीष शर्मा,माधव सिंह यादव,

26 अग॰ 2007

है दुनिया "आभास की "









आप सबके लिए

आभार की "अभिव्यक्ति" के लिए शब्द नहीं है..
हमारे पास,उम्दा फनकार को आपका प्यार मिलता रहेगा हमें उम्मीद है..........!!
ABHAAS
आभास जोशी स्नेह मंच,
जबलपुर , मध्य प्रदेश

कितना असरदार

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