
आईए इक भोर
लेकर पोटली में चलें
लेकर पोटली में चलें
घर उनके जहाँ हो घुप अन्धेरा,
जिनने देखा न हो इक युग से सवेरा !!
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पोटली मे -इतनी -रश्मियाँ रख लेना इतनी
कि कोई मांगे रास्ते मे कम न हो !
कि कोई मांगे रास्ते मे कम न हो !
हर किसी मोहताज को दे-देगें हम...!!
और हाँ ! बांटने मे हमको भी कुछ गम न हो !!
सूरज अकेला है मदद तो नही मांगता फिर भी
हम दीपक उसके काम को आगे बढ़ाए--
हम दीपक उसके काम को आगे बढ़ाए--
चलो उठो पोटली में भोर लेकर उजियारा बाँट आएं ......!!