मत्स्य गंधी होके जल से आपको एतराज़ कैसा
इस आभासी फलक पे आपका विश्वास कैसा..?
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पता था की धूप में होगा निकलना ,
स्वेद कण का भाल पे सर सर फिसलना
साथ छाजल लेके निकले, सर पे साफा बाँधके
खोज है मत रोकिये इस खोज में मधुमास क्या बैसाख कैसा ?
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ओ अनुज तुम बाड़ियों में शूल के बिरवे न रोपो
तुम सही हो इस-सत्य को कसौटी पे कसो सोचो
वरना कुंठा के तले , शक्ति का उपवास कैसा ...?
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मयकदा पास हैं पर बंदिश हैं ही कुछ ऐसी ..... मयकश बादशा है और हम सब दिलजले हैं !!
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29 मार्च 2009
इस आभासी फलक पे आपका विश्वास कैसा..?
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