हमन हैं इश्क मस्ताना,

हमन हैं इश्क मस्ताना,हमन को होशियारी क्या ।
रहें आजाद या जग में,हमें दुनिया से यारी क्या ॥
जो बिछुड़े हैं पियारे से,भटकते दर बदर फिरते ।
हमारा यार है हम में,हमन को इन्त्जारी क्या ॥
खलक(ब्रह्माण्ड ) सब नाम अपने को,
बहुत कर सिर पटकता है ।
हमन गुरु ग्यान आलिम हैं,
हमन को नामदारी क्या ॥
न पल बिछड़े पिया हमसे,न हम बिछड़े पियारे से ।
हो ऐसी लव लगी हरदम,हमन को बेकरारि क्या ॥
'कबीरा' इश्क क माता,
दुई को दूर कर दिल से ।
ये चलन राह नाजुक है,हमन शिर बोझ भारी क्या ॥

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!