आइये ..थोडा हँस लें .!



आज मैंनें आभास को ख़ूब फटकारा
१५/०५/०७ के स्टार वाईस आफ़
इंडिया के सैट पर
शादी का गाना गाकर जो हंगामा खड़ा कर दिया . "आभास की उम्र १७ साल जानते हुए अलका जीं का उसके लिए शादी का इश्तहार जारी करना आभास का छज्जे पर खडे होके छोरी की तलाश के लिए चीखना !!" इस ख़बर से मुम्बई में ३ महीने रहने वाले
बडे भाई श्रेयश ने फ़ोन पर बताया "चचा ! इसने तो मुम्बई आकर नाटक शुरू कर दिए शादी के लिए बावला हो रहा है " फोन सुनकर मेरा
क्रोध सातवे आस्मां पे, भाई जितेन्द्र भी ग़ुस्से में थे इतने कि पानी का एक गिलास मुँह में लगाया , जब मुँह से हटाया तो उनके दांत स्टील के उस गिलास में बने थे .
पापा रविन्द्र जीं की मिली भगत से आभास शादी के लिए उतावला था हम को शक था जो सही निकला .
वे हम सभी को देख के हँसे जा रहे थे.
अब मेरी बारी थी मामले को निपटाने की ... सो मैने आभास को "बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम १९२९ के तहत कार्रवाई करने की धमकी भरा एस.एम्.एस. किया आभास को .
आभास ने तुरंत काल बैक किया .
“चाचा मुझे मालूम है कि आप बाल विकास अधिकारी हैं.! सोचा था मामला दबा देंगे ?”
मैने उसे फटकारा -"भैये कानून की नज़र में सब एक बराबर हैं...समझा देना अलका जीं को ओर सभी को कि बाल विवाह करने,कराने उसमें भाग लेनें वाले सभी अपराधी होते हैं......."
दूसरी तरफ आभास की रिरियाती आवाज़ सुनाई दे रही थी ..!
"हाँ चाचा..नहीं चचा..!!"
फोन बंद करते ही फोन फिर बजा .. श्रेयश का फोन था
"क्या हुआ चचा...?
मैंनें उसे बताया.."भाई तुम जैसे बडे भाई के होते आभास शादी अब नहीं कर सकता
मैंने फटकार लगा दीं है उसे "
आभास को फटकार सुनकर श्रेयष बेहद खुश हुआ यह जानकर कि आभास की छोरी खोजने का अभियान
४ साल बाद के लिए टल गया बडे भाई के लिए इससे बेहतर बात और क्या होगी !!

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!