डाक्टर प्रहलाद पटेल का अशोभनीय बर्ताव

माननीय श्री प्रहलाद पटेल सदस्य जिला पंचायत द्वारा मुझे अपमानित किया

आज दिनांक 24/09/2007 को ज़िला स्तरीय आपत्ति समिति की बैठक में ग्राम बह्म्नी में आंगन वाडी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति को लेकर मान नीय श्री प्रहलाद पटेल जी, ने मुझे बैठक कक्ष निरर्थक संबोधन करते रहे अपितु प्रस्थान के समय उन्हों ने मुझे मेरी स्व0 माँ के प्रति अश्लील गालियाँ देते हुए मुझे सरे आम बुलाकर अपमानित किया जिसके साक्ष्य श्री मनीष शर्मा, श्रीमति किरण पांडेय, कु. माया मिश्रा तथा श्री रोहित दीवान है.
श्री प्रहलाद पटेल जी द्वारा श्रीमती अमृता पटेल की नियुक्ति एन केन प्रकारेण करने की की धमकी भरी सलाह
दी गयी है. आवेदिका विवाहित हैं, तथा उन्हौंने अपने पिता के स्थानीय निवास संबंधी दस्तावेज़ आवेदन के साथ प्रस्तुत किए
थे, जो नियामानुसार आवेदिका के लिए निर्ह्नरता का कारण हैं. शिकायत कर्ता ग्राम वासियों द्वारा प्रेषित शिकायत में उक्त आवेदिका श्रीमती अमृता पटेल के संबंध में लेख
किया है कि वे माननीय जनप्रतिनिधि महोदय के सगे भाई की पुत्री हैं जिनका विवाह निवास तहसील में हों चुका है...
उक्त जन प्रतिनिधि महोदय लंबे समय से मुझे अपमानित करने एवम धमकाने का कार्य कर रहे हैं !

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
    ऎसेही लिखेते रहिये.
    क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
    जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

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  2. आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
    ऎसेही लिखेते रहिये.
    क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
    जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

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  3. मैं आपकी समस्या को समझ रहा हूँ ..! सत्ता के मद में चूर लोग अक्सर यही करते हैं.... ये वो मक्कारियां हैं जो सत्ता के लिहाफ में कीड़े की तरह पनपतीं हैं... आप चिंतित न हों मई आपकी मदद करूंगा ... एक मटर की तरह आप को मैं अपना परिचय फिर कभी दूंगा मैने आपकी समस्या को नोट कर लिया है...!

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!