श्री राम ठाकुर "दादा"

चुटीले व्यंगकार श्री राम ठाकुर दादा की कृतियाँ अफSAR KO NAHIN DOSH GUSHAIN ,DAANT DIKHANE KE ,आईं लोकप्रिय रहीं और उनको राष्ट्रीय स्तर पे पहचान मिलने के बाद उनकी नवीनतम कृति
मERI EK SOU IKKIS LAGHUKATHAYEN ,अब उपलब्ध है।

1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!