बाप रे बाप .....! ये क्या ......?


भाई हिंद युग्म & कम्पनी वालो क्या ज़बरदस्त की पांचवीं किश्त जारी करनी पड़ी
जिसके प्रतिभागी ये सब
=> आकांक्षा यादव सी आर.राजश्री निखिल आनंद गिरि गीतिका भारद्वाज मनीषा वर्मा धर्म प्रकाश जैन मीना जैन अर्पित सिंह परिहार प्रमेन्द्र प्रताप सिंह श्रीमती पुष्पा राणा उत्पल कान्त मिश्रा विश्व दीपक 'तन्हा' कुमार मुकुल अवनीश गौतम अनिता कुमार
यानी अंतर्जाल पे हिंदी के इत्ते सारे दस्तख़त
यानी
मुझे सबको भागीदारी के लिए बधाई देना होगा
तो
"मेरी हार्दिक बधाइयां "

इस लिए भी कि युग्म को यहाँ =>दैनिक भास्कर सम्मान मिला

सुधि पाठकों , परिश्रमी लेखकों को भी लख लख बधाईयाँ

प्रतियोगिता:-

"गीत लिखिए" :-"ख़ुद से कैसे भाग सकेगा अंतस पहरेदार कड़क हैं"

इस मुखड़े पे गीत लिख भेजिए अन्तिम तिथि

=>30 जून 2008 से बढा कर 15 जुलाई 2008 कर दी गयी

है

email:- girishbillore@gmail।com अथवा girishbillore@hotmail।com नियमों की प्रतीक्षा कीजिए मुझे आपके एक गीत की प्रतीक्षा है अन्तिम तिथि तक प्राप्त गीत प्रकाशित कर दिए जाएंगे प्रकाशित गीतों पर विशेषज्ञों की राय,(गुणांक),तथा पाठकों की राय (गुणांक) के आधार पर विजेताओं की घोषणा कर दी जावेगी ! पुरूस्कार राशि के रूप में न होकर "...........................!" के रूप में होगा !!



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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!