आप कितने बड़े मैजीशियन हों



सच में आप कितने भी बड़े जादूगर हैं किंतु गाजर से बड़े नहीं हो सकते । इसका प्रमाण आपके सामने है । अस्तु मित्रों
बाजीगर अथवा जादूगरी से बढकर होती है ज़मूरे के पेट की आग उसे बुझाइये फ़िर हौले से छा जाइए । भारत वर्ष के सन्दर्भ में अगर वर्तमान में चुनाव के सन्दर्भ में इसे देखें अथवा किसी अन्य सन्दर्भ में देखें तो तय है उपरोक्त कार्टून फ़िल्म सम-सामायिक ही है।

1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!