रत्नगर्भा : मध्य प्रदेश लेखिका संघ की सफल कोशिश


संस्कारधानी की महिला रचना धर्मियों का संक्षिप्त परिचय रत्नगर्भा से आभार सहित प्राप्त कर प्रस्तुत है













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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!