अरुण ये मधुमय देश हमारा


एम् पी थ्री के रूप में हिन्दयुग्म के लिए चाही थी किन्तु श्रद्धा की तबियत बिगड़ जाने से प्रविष्ठी हेतु रिकार्डिंग न हो सकी. हिंदयुग्महिन्दयुग्म के पाडकास्ट प्रभाग "आवाज़" की प्रेरणा से श्रद्धा बिटिया ने जो तैयारी की थी देखें कैसी थी वो तैयारी इस वीडियो में इस गीत का संगीत निर्देशन श्रद्धा बिटिया की गुरु आदरणीया मौसमी नंदी जी ने किया . उनके प्रति आभार के साथ आज रविवार को यह गीत आपकी नज़र कर रहा हूँ सादर

3 टिप्‍पणियां:

  1. बिटिया का प्रयास सराहनीय है. हमारी शुभकामनाएँ.

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  2. बहुत सुन्दर प्रयास ! प्रस्तुति का आभार ।

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  3. श्रद्धा बिटिया को मैंने पहले भी सुना है.
    हमें उस से बहुत उम्मीद है.
    हम उसके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं.
    - विजय

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कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!