' ज़टिल और कुंठित पोस्ट का ब्लाग पर प्रभाव सदैव ही होता है. यहां आज़ बात आरम्भ करना चाहूंगा महत्वपूर्ण टिप्पणी को यथा रूप प्रस्तुत कर रहा हूं हिमांशु जी , आपका सुझाव सीमित रूप में लागू है। अगली कड़ी में शायद कुछ और पते की बात मिले, मगर इस बारे में तो यही कहना पड़ता है कि जो हिन्दी की सेवा, या पत्रकारिता के एक अन्य माध्यम के रूप में ब्लॉगरी को ले रहे हों, उनके लिए तो यह बात पूरी तरह सही है। बहुत से लोग ब्लॉग लिखने को न आत्ममुग्धता-आत्मप्रशंसा मानते हैं और न ही ऐसा अभिव्यक्ति का माध्यम जो उन्हें दमित अभिव्यक्ति की इच्छाओं को पूरा करने के काम आए, निरंकुश। बहुधा तो लोग शौकिया ही हाथ आज़माने चले आते हैं। अन्य भी बहुत से कारण होते हैं ब्लॉग लेखन के। उनके लिए यह सुझाव पूरी तरह लागू नहीं होता है। इस सुझाव के लागू कर लेने से भी पाठकों में बहुत अन्तर नहीं पड़ने वाला। सिवाय ब्लॉग लेखकों के कम ही शुद्ध पाठक आते हैं ब्लॉग पढ़ने। ज़्यादातर लोग जो ब्लॉग सिर्फ़ पढ़ते हैं वे अन्य सामाजिक नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से ही आते हैं, और उतना ही पढ़कर लौट जाते हैं जो उन्हें यहाँ खींचकर लाया होता है।जब तक यहाँ ऐसा मौलिक लेखन नहीं होता जो अन्यत्र उपलब्ध न हो, शुद्ध पाठकों की अपेक्षा बेमानी ही है।
हिमांशु जी ने सही कहा कि सुझाव सीमित रूप से लागू हैं ..... मेरा मानना था कि शायद लागू भी न हो सकने के काबिल हों..? वास्तव में मैं अन्तरजाल के तकनीकी स्वरूप को रेखांकित कर रहा हूं..हो सकता है छोटे हाथों से चांद-सितारे छूने की कोशिश हो यह ..किन्तु हिन्दी सेवा का अर्थ यहां यह लगा रहा हूं कि सम्पूर्ण विषयों में जानकारीयां /सूचनाएं/पाठ्य-सामग्रियां नेट पर उपब्ध हों ताकि कल ब्रह्माण्ड में होने वाली तलाशों में हिन्दी में उपस्थित कंटैंट्स का अभाव न हो. जो लोग शौकिया ही हाथ आज़माने चले आते हैं वे वास्तव में इसे आत्मसात करें. कल विश्व/ब्रह्माण्ड में हिन्दी में होने वाली तलाश करने वालों को निराश न होना पड़े.
कल ही मुझे स्वच्छ-पानी से सम्बंधित कुछ सन्देशों की ज़रूरत थी नेट पर उनकी अनुपलब्धता से मन को हताशा हुई. आम जीवन से जुड़े विषयों की सामग्री की उपलब्धता न होना हिन्दी-सेवा के नारों को तार तार करेगा ही तो क्यों न हम अपने ज्ञान को जिसे बांटना हमारा लक्ष्य है ब्लाग/वेबसाईट्स पर सजाएं. आप दुनियां में सर्वग्य की श्रेणी में हों किन्तु आपकी प्रतिभा का जन साधारण के जीवन के लिये क्या उपयोग है यह एक अहम मुद्दा होना चाहिये.
गर्मागर्म विषय लिखने के लिए बहुत से फ़ौरी फ़ायदे हो सकते हैं हिन्दी की सेवा की श्रेणी का बिगुल वादन इस तरह के ब्लागर्स न करें तो हिन्दी की सच्ची सेवा होगी.
कुछ ब्लागर्स यहाँ तक कि नेट पत्रिकाए तक गुदाज़ मांसल तस्वीरों को परोस रहीं / रहे हैं कुछेक हिट और फिट बने रहने के लिए सियासत का सहारा लेते हैं . कुछ तो धर्मांध पोस्ट परोस के उकसाते हैं दूसरों को और कुछेक अपने आप को ब्लाग जगत में ”बोफ़ोर्स” साबित कर रहे हैं बस मूल कार्य को छोड़ सब कुछ बहुतायत में ज़ारी है ...
क्रमश:.....
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