आओ… और तुम भी गाओ…:-कु.दर्शिता श्रीवास्तव


आओ… और तुम भी गाओ…
जिंदगी का… गााना
छोड़ अपने दिल की,
धुनों का तराना…
आओ… और तुम भी गाओ…
जिंदगी का गाना…
क्योंकि यूंहि हॅंसते-हॅंसते…
एक दिन हमें ऊपर चले जाना…
यही तो रीत है…
इसलिये ये गीत है…
जो है जिंदगी का फसाना…
तो आओ… और तुम भी गाओ…
जिंदगी का गाना…
उदासी के बादलों पे…
खुशी की एक रोशनी पड़ने दो…
जिंदगी को फिर तुम,
इन्द्रधनुष सी खिलने दो…
ज्यादा न सोचो तुम…
बस यूंहि सुर से सुर…
मिलाओ तुम…
मुस्कुराओ तुम…
और गुनगुनाओ तुम…
ये जिंदगी का…
जिंदगी का गाना…
अब उसपे न रोना तुम…
जिसे कभी… सालों पहले…
तुम्हें था पाना…
क्योंकि जो भी है तुम्हारे पास
वही है सबसे कीमती नज़राना…
छोड़ दो अब झूठे बहाने बनाना…
और दिल से गाओ…
ये जिंदगी का गाना…
जिंदगी का गाना…
संपर्क -
कु.दर्शिता श्रीवास्तव
जी.ए.डी.कॉलोनी
बारापत्थर, सिवनी (म.प्र.)
(साई फीचर्स)

1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!